पुलवामा आतंकी हमले की 7वीं बरसी : उन वीरों को नमन, जिन्होंने हंसते-हंसते देश पर जान लुटा दी

(सलीम रज़ा,पत्रकार )
14 फरवरी का दिन आते ही पूरे देश का दिल भारी हो जाता है। यह वही दिन है जब 2019 में पुलवामा की धरती पर एक ऐसा दर्दनाक आतंकी हमला हुआ था, जिसने पूरे भारत को अंदर तक हिला दिया। उस दिन सिर्फ 40 से ज्यादा जवान शहीद नहीं हुए थे, बल्कि 40 से ज्यादा परिवारों की खुशियां भी हमेशा के लिए छिन गई थीं। उस दिन कई घरों के चिराग बुझ गए थे, कई मांओं की गोद सूनी हो गई थी, कई पत्नियों का सहारा छिन गया था, और कई बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया था।
उस दिन दोपहर का समय था। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था। जवानों के मन में अपने कर्तव्य का जज्बा था। कुछ जवान छुट्टी से लौट रहे थे, कुछ अपने परिवार से मिलकर वापस ड्यूटी पर जा रहे थे। किसी ने अपनी मां से वादा किया था कि जल्दी वापस आएगा, किसी ने अपने बच्चे से कहा था कि खिलौना लेकर आएगा, किसी ने अपनी पत्नी से कहा था कि अपना ख्याल रखना।लेकिन किसे पता था कि यह सफर उनका आखिरी सफर बन जाएगा।
अचानक एक विस्फोटकों से भरी कार जवानों की बस से टकराई और एक जोरदार धमाका हुआ। कुछ ही सेकंड में सब कुछ बदल गया। धुएं का गुबार, चारों तरफ मलबा, और दर्द की एक ऐसी कहानी, जिसे सुनकर आज भी आंखें नम हो जाती हैं। उस एक पल में 40 से ज्यादा जवानों ने देश के लिए अपनी जान दे दी। उन्होंने अपने परिवार से ज्यादा अपने देश को चुना।
इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली। यह सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर चोट थी। लेकिन आतंकियों को यह नहीं पता था कि वे भारत को डरा नहीं सकते। वे भारत की हिम्मत को तोड़ नहीं सकते।
जब यह खबर पूरे भारत में फैली, तो हर आंख नम थी। लोग टीवी के सामने खड़े होकर रो रहे थे। हर कोई यही सोच रहा था कि जिन जवानों ने अपनी जान दी, वे भी किसी के अपने थे। पूरे देश में शोक की लहर थी, लेकिन साथ ही गर्व भी था कि हमारे जवानों ने देश के लिए अपनी जान दी।
गांव-गांव, शहर-शहर में लोगों ने मोमबत्तियां जलाईं। छोटे-छोटे बच्चे भी हाथ में तिरंगा लेकर खड़े थे। लोगों ने शहीदों के नाम के नारे लगाए। हर किसी के दिल में एक ही भावना थी — अपने वीर जवानों के लिए सम्मान।
उस समय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। यह सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि पूरे देश की भावना थी। हर भारतीय चाहता था कि शहीदों को न्याय मिले।
लेकिन सबसे ज्यादा दर्द उन परिवारों को हुआ, जिन्होंने अपने बेटे, पति या पिता को खो दिया। एक मां, जिसने अपने बेटे को बचपन से बड़ा किया, उसे देश के लिए खो दिया। एक पत्नी, जिसने अपने पति के साथ जीवन बिताने के सपने देखे थे, वह अकेली रह गई। छोटे-छोटे बच्चे, जिन्हें अभी यह भी समझ नहीं था कि उनके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे।
फिर भी, उन परिवारों ने गर्व से कहा कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। उनके आंसुओं में दर्द था, लेकिन गर्व भी था।
यह हमला हमें यह याद दिलाता है कि हमारे जवान कितनी कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं। वे ठंड, गर्मी, बारिश, हर मुश्किल का सामना करते हैं, ताकि हम अपने घरों में सुरक्षित रह सकें। जब हम अपने परिवार के साथ आराम से सोते हैं, तब हमारे जवान सीमा पर जागते हैं।
पुलवामा के शहीदों ने हमें यह सिखाया कि देश सबसे ऊपर होता है। उनका बलिदान हमें हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उनका नाम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।
आज जब पुलवामा की बरसी आती है, तो पूरा देश एक बार फिर उन वीर सपूतों को याद करता है। उनकी तस्वीरों को देखकर आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन दिल गर्व से भर जाता है। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी याद, उनका साहस और उनका बलिदान हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा।
वे चले गए, लेकिन हमें सुरक्षित छोड़ गए।
वे सो गए, लेकिन हमें जगाकर चले गए।
वे खो गए, लेकिन भारत को और मजबूत बना गए।
भारत हमेशा अपने इन वीर सपूतों का ऋणी रहेगा। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी शहादत हमेशा हमें यह याद दिलाती रहेगी कि देश की रक्षा के लिए कुछ लोग अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर देते हैं।
शहीद कभी मरते नहीं, वे हमेशा अमर रहते हैं।…….जय हिन्द