Sat. Feb 21st, 2026

क्लीनिक की ऊपरी मंजिल पर चल रही थी अवैध दवा फैक्ट्री, विभाग ने भरे सैंपल

देहरादून : अवैध आयुर्वेदिक दवा निर्माण और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और राज्य आयुर्वेद विभाग की संयुक्त टीम ने सहस्त्रधारा रोड स्थित एक निजी क्लीनिक पर छापा मारकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए। यह कार्रवाई आयुष मंत्रालय को प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई।

छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने पाया कि क्लीनिक का संचालक बिना किसी वैध डिग्री और लाइसेंस के स्वयं को पंजीकृत चिकित्सक बताकर मरीजों का उपचार कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि संचालक के पास आयुर्वेद, यूनानी या होम्योपैथी पद्धति में कोई मान्यता प्राप्त शैक्षणिक योग्यता नहीं है, फिर भी वह मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे गंभीर रोगों के मरीजों को परामर्श दे रहा था।

टीम ने मौके से भारी मात्रा में तैयार एवं अर्धनिर्मित आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवाइयां बरामद कीं। जांच में यह भी पाया गया कि क्लीनिक की ऊपरी मंजिल पर बिना किसी अधिकृत लाइसेंस के दवाओं का निर्माण और पैकिंग की जा रही थी। वहां से लेबल, पैकेजिंग सामग्री, बिल बुक, रजिस्टर और औषधि निर्माण में प्रयुक्त मशीनें भी जब्त की गईं।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी एक्यूप्रेशर के नाम पर लेटरहेड का उपयोग कर मरीजों को उपचार का दावा करता था और विभिन्न राज्यों में दवाओं की आपूर्ति भी कर रहा था। छापेमारी के दौरान नकदी भी बरामद हुई है, जिसके संबंध में आयकर विभाग को सूचना दे दी गई है।

सीडीएससीओ की टीम ने संदेहास्पद दवाओं के नमूने जांच के लिए एकत्र किए हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ दवाओं में मिलावट हो सकती है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस और बिना योग्यता के चिकित्सा करना गंभीर अपराध है और यह सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। मामले में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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