देवलीखान बनेगा मशरूम विलेज, किसानों की आय में आएगा बड़ा उछाल
अल्मोड़ा जिले के देवलीखान गांव को मशरूम विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां 22.5 लाख रुपये की लागत से 10 मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित होंगी। 90% सब्सिडी, प्रशिक्षण और कम्पोस्ट सहायता के साथ किसान सालाना 56 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर सकेंगे। यह पहल किसानों के लिए स्वरोजगार, पोषण सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
अल्मोड़ा में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा
अल्मोड़ा : जिले में मशरूम उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रमुख साधन बनता जा रहा है। कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण किसान तेजी से मशरूम की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसी क्रम में उद्यान विभाग द्वारा जिले में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
देवलीखान गांव बनेगा मशरूम विलेज
जिला योजना के तहत प्राप्त 22.5 लाख रुपये की धनराशि से हवालबाग ब्लॉक के देवलीखान गांव को मशरूम विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत गांव में 10 मशरूम उत्पादन इकाइयों की स्थापना की जा रही है। प्रत्येक इकाई के लिए ग्रामीण किसानों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
आय और उत्पादन के आंकड़े
उद्यान विभाग के अनुसार,
एक मशरूम इकाई से सालाना लगभग 3750 किलो मशरूम का उत्पादन होगा
इससे किसान को करीब 5.62 लाख रुपये की आय होने की संभावना है
10 इकाइयों से कुल उत्पादन 37 हजार किलो प्रतिवर्ष होगा
इससे किसानों की कुल अनुमानित आय लगभग 56 लाख रुपये तक पहुंचेगी
यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगी।
प्रशिक्षण और कंपोस्ट वितरण
मशरूम विलेज योजना के साथ-साथ उद्यान विभाग द्वारा किसानों को मशरूम कम्पोस्ट और तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
जिला योजना के तहत अब तक:
72 किसानों को मशरूम कम्पोस्ट वितरित किया गया
50 प्रतिशत राज सहायता प्रदान की गई
कुल 72 टन मशरूम कम्पोस्ट खाद का वितरण किया गया
विभाग के अनुसार, इसके परिणाम काफी सकारात्मक सामने आए हैं।
अधिकारी का बयान
मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया,
“यह विभाग की नई पहल है। किसानों को पोषण सुरक्षा और स्वरोजगार के अवसर देने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। देवलीखान गांव में 10 मशरूम इकाइयों की स्थापना कर इसे मशरूम विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है।”