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खाड़ी में बढ़ा तनाव: दुबई में धमाकों और आग की सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद पश्चिम एशिया में शुरू हुआ सैन्य टकराव अब खाड़ी देशों तक फैलता दिखाई दे रहा है। हाल ही में जारी सैटेलाइट तस्वीरों में दुबई के कुछ हिस्सों से उठता धुआं देखा गया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। तस्वीरों में शहर की सामान्य रूप से साफ दिखने वाली स्काईलाइन की जगह कई इलाकों में धुएं के गुबार नजर आए, हालांकि शुरुआती आकलन बड़े पैमाने की तबाही के बजाय सीमित आगजनी की ओर इशारा करते हैं।

दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में गिने जाने वाले जबल अली पोर्ट के एक हिस्से में आग लगने की पुष्टि हुई है। सैटेलाइट विजुअल्स में एक बर्थ से घना काला धुआं उठता दिखाई दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह आग कथित तौर पर उस समय लगी जब सुरक्षा प्रणालियों द्वारा रोकी गई एक मिसाइल का मलबा पोर्ट क्षेत्र में गिर गया। इसके अलावा दुबई के कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में भी स्थानीय स्तर पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज धमाकों की आवाज सुनने और एयर-डिफेंस सिस्टम के सक्रिय होने की बात कही। इमरजेंसी सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के साथ प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित करने की कार्रवाई शुरू की। हालात को देखते हुए एहतियातन कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

बताया जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं। अधिकतर प्रोजेक्टाइल को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन गिरे हुए मलबे से कुछ स्थानों पर नुकसान हुआ। शहर के प्रतिष्ठित स्थलों जैसे बुर्ज अल अरब और पाम जुमेराह के आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई।

तनावपूर्ण माहौल के बीच संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों को कर्मचारियों को अस्थायी रूप से घर से काम करने की अनुमति देने की सलाह दी है। वहीं यूएई ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं।

इसके साथ ही यूएई ने तेहरान स्थित अपने दूतावास को बंद करने और अपने राजनयिक स्टाफ को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच खाड़ी देशों में सतर्कता उच्च स्तर पर बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर रखे हुए है।

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