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बुर्के में कांवड़ यात्रा: सामाजिक सद्भाव की अनोखी तस्वीर

(सलीम रज़ा,पत्रकार )

आस्था का मार्ग अक्सर उन सीमाओं को मिटा देता है, जिन्हें समाज ने अपने मन में खींच रखा होता है। ऐसा ही एक अद्भुत और भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब संभल जिले के बदनपुर बसी गांव की रहने वाली तमन्ना मलिक ने अपने दिल में अटूट श्रद्धा लेकर कांवड़ यात्रा शुरू की। बुर्का पहने हुए, सिर पर आस्था का प्रतीक कांवड़ उठाए, वह हजारों श्रद्धालुओं के साथ उस पवित्र पथ पर चल रही हैं, जो सीधे भक्ति और विश्वास की मंजिल तक पहुंचाता है। उनका यह कदम न केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सच्ची आस्था किसी धर्म, वेशभूषा या पहचान की मोहताज नहीं होती।

तमन्ना ने अपनी यात्रा की शुरुआत पवित्र नगरी हरिद्वार से की, जहां से उन्होंने अपने हाथों से पवित्र गंगा नदी का जल भरा। गंगा का जल केवल एक नदी का पानी नहीं माना जाता, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। जब तमन्ना ने उस जल को अपने कांवड़ में रखा, तो वह केवल जल नहीं था, बल्कि उनके दिल की श्रद्धा, उनके विश्वास की शक्ति और उनके संकल्प का प्रतीक बन गया। उनका लक्ष्य स्पष्ट है—अपने गांव पहुंचकर पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ भगवान शिव को जल अर्पित करना।

इस यात्रा के दौरान जब उनका काफिला बिजनौर पहुंचा, तो वहां का दृश्य बेहद भावुक और प्रेरणादायक था। रास्ते के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका स्वागत फूलमालाओं से किया, उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनके साहस तथा श्रद्धा को नमन किया। कई लोगों की आंखों में आश्चर्य था, लेकिन उससे कहीं अधिक सम्मान और गर्व था। लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं, उनका हौसला बढ़ाया और ‘बोल बम’ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उस क्षण ऐसा लग रहा था मानो आस्था ने सभी भेद मिटा दिए हों और केवल भक्ति ही सबसे बड़ा सत्य बन गई हो।

तमन्ना के साथ करीब सौ शिवभक्त भी इस यात्रा में शामिल हैं, जो हर कदम पर उनका साथ दे रहे हैं। उनके कदमों की थकान, धूप की तपिश और लंबा रास्ता—इन सबके बावजूद उनके चेहरे पर जो शांति और संतोष है, वह केवल सच्ची आस्था से ही मिल सकता है। हर कदम पर उनके होंठों से निकलता ‘बोल बम’ का जयकारा उनके विश्वास की गहराई को दर्शाता है। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा और ईश्वर के बीच का संवाद है, जिसमें शब्दों की नहीं, भावनाओं की जरूरत होती है।

तमन्ना ने यह यात्रा अपने परिवार की सहमति और आशीर्वाद से शुरू की है। उनके इस निर्णय में परिवार ने उनका पूरा साथ दिया, जो यह दिखाता है कि आस्था और विश्वास दिलों को जोड़ने का काम करते हैं, न कि तोड़ने का। बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करना अपने आप में एक अनोखा दृश्य है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लेकिन तमन्ना के लिए यह कोई प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके दिल की पुकार है, जिसे वह पूरे समर्पण के साथ पूरा कर रही हैं।

इस यात्रा के दौरान सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी उनके साथ चल रहा है, ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके। लेकिन असली सुरक्षा उनके विश्वास में है, जो उन्हें हर कठिनाई से आगे बढ़ने की शक्ति देता है। रास्ते में मिलने वाले लोगों का प्यार, सम्मान और समर्थन उनके हौसले को और मजबूत बना रहा है।

तमन्ना की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और एकता का जीवंत उदाहरण बन गई है। यह दृश्य यह सिखाता है कि जब दिल में सच्ची श्रद्धा होती है, तो कोई भी दीवार उसे रोक नहीं सकती। आस्था का रास्ता हमेशा दिल से होकर गुजरता है, और उस रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति केवल ईश्वर के करीब ही नहीं पहुंचता, बल्कि इंसानियत के सबसे सुंदर रूप को भी महसूस करता है।

उनके कदमों की आवाज, उनके कंधों पर रखा कांवड़, और उनके चेहरे पर झलकती शांति—ये सब मिलकर एक ऐसा संदेश दे रहे हैं, जो शब्दों से कहीं अधिक गहरा है। यह संदेश है कि ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता केवल प्रेम, श्रद्धा और विश्वास से होकर जाता है। तमन्ना की यह यात्रा आने वाले समय में लोगों के दिलों में एक प्रेरणा बनकर रहेगी, और यह याद दिलाएगी कि जब आस्था सच्ची होती है, तो वह हर सीमा को पार कर जाती है और हर दिल को जोड़ देती है।

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