तीन चरणों में पूरी होगी जनगणना, बर्फबारी वाले क्षेत्रों में सितंबर में होगी गणना
देहरादून: केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना की अधिसूचना जारी होने के साथ ही उत्तराखंड की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील कर दी गई हैं। अब जनगणना पूरी होने तक किसी भी जिले, तहसील, निकाय, पंचायत या वार्ड की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। अधिसूचना के बाद सरकार नए नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायतों का गठन भी नहीं कर पाएगी और न ही किसी गांव को नगर निकाय में शामिल किया जा सकेगा। यह व्यवस्था जनगणना के आंकड़ों की सटीकता बनाए रखने के लिए जरूरी है, ताकि सीमाओं में बदलाव से जनसंख्या डाटा में कोई गड़बड़ी न हो। हालांकि, इस दौरान सार्वजनिक सुविधाओं और सामान्य सरकारी कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
जनगणना की प्रक्रिया के तहत 16 फरवरी से चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू होगा। इस चरण में 23 कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा, जबकि 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। फील्ड ट्रेनर 4,000 सुपरवाइजर और लगभग 30,000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। 25 मार्च से 7 अप्रैल के बीच इन कर्मचारियों और सुपरवाइजरों का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक बैच में 40 कर्मचारियों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जनगणना तीन चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और गणना होगी। दूसरे चरण में बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 11 से 30 सितंबर 2026 के बीच लोगों की गणना की जाएगी, क्योंकि इन क्षेत्रों के लोग सर्दियों में पलायन कर जाते हैं। तीसरे चरण में 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच अन्य क्षेत्रों में देशभर के साथ जनगणना पूरी की जाएगी।
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद प्रदेश की सीमाएं जनगणना पूरी होने तक स्थिर रहेंगी और किसी भी प्रशासनिक सीमा में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।