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सिनेमा हॉल में भी बजेगा वंदे मातरम, खड़ा होना अनिवार्य नहीं

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम को लेकर नए दिशानिर्देश जारी करते हुए सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य कर दिया है। राष्ट्रपति समारोहों और पद्म पुरस्कार कार्यक्रमों में भी इसके बजने का प्रावधान किया गया है। सिनेमा हॉल में राष्ट्रगीत बजेगा, पर खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। सभी छह श्लोक शामिल करने के निर्णय से राजनीतिक विवाद की संभावना भी बढ़ गई है। यह कदम राष्ट्रगीत के सम्मान को औपचारिक रूप देने और राष्ट्रीय प्रतीकों को सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में नया प्रोटोकॉल

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को वंदे मातरम को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार अब सभी सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। इसके दौरान सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।

अब तक वंदे मातरम के लिए कोई स्पष्ट राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तय नहीं था, जबकि राष्ट्रगान के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश मौजूद थे। मंत्रालय का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रगीत के सम्मान को औपचारिक रूप देना और सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में एकरूपता सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रपति समारोह और पद्म पुरस्कार में भी अनिवार्यता

नए निर्देशों के अनुसार पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों और राष्ट्रपति की उपस्थिति में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में उनके आगमन और प्रस्थान के समय राष्ट्रगीत बजाना अनिवार्य होगा।यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत को इस तरह औपचारिक रूप से राज्य समारोहों के प्रोटोकॉल में शामिल किया गया है।

सार्वजनिक स्थानों और सिनेमा हॉल में प्रावधान

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिनेमा हॉल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी वंदे मातरम बजाया जाएगा। हालांकि इस दौरान खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा।विशेष बात यह है कि अब वंदे मातरम के सभी छह श्लोक बजाए जाएंगे, जिनमें वे चार श्लोक भी शामिल हैं जिन्हें 1937 में कांग्रेस द्वारा हटाया गया था। यही निर्णय भविष्य में विवाद का कारण बन सकता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक वर्ष तक चलने वाले समारोह का शुभारंभ किया है। यह मुद्दा संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच तीखी बहस का विषय बना रहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पूर्ववर्ती जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना का अनुसरण करते हुए इस गीत का विरोध किया, क्योंकि इससे मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती थीं। इसके जवाब में भाजपा ने नेहरू के पुराने पत्र साझा किए, जिसके बाद संसद में हुई बहस ने राजनीतिक रंग ले लिया।

ऐतिहासिक महत्व

वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में की थी। इसे 1950 में राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बना और आज भी इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बना हुआ है।सरकार का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों को लोकप्रिय बनाने और उनके प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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