Sat. Jan 17th, 2026

पंचायत चुनाव में किसका बजेगा डंका? आरक्षण ने बदले समीकरण

(सलीम रज़ा पत्रकार )

उत्तराखण्ड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही प्रदेश के गांव-गांव में चुनावी हलचल तेज हो गई है। लोकतंत्र की जड़ें माने जाने वाले इन पंचायत चुनावों में हर वर्ग की भागीदारी और उम्मीदें जुड़ी होती हैं। जहां एक ओर यह चुनाव स्थानीय स्तर पर विकास की दिशा तय करता है, वहीं दूसरी ओर यह राजनीतिक दलों की सांगठनिक पकड़ और कार्यकर्ताओं की ताकत का भी वास्तविक परीक्षण होता है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आरक्षण प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद से ही संभावित उम्मीदवारों की बैठकों, रणनीतियों और समीकरणों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

इस बार पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी भूमिका आरक्षण व्यवस्था निभा रही है। उत्तराखण्ड के सभी जिलों में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत पदों के लिए आरक्षण सूची जारी हो चुकी है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए तय आरक्षण ने जहां कुछ दावेदारों की राह रोकी है, वहीं नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतरने का अवसर दिया है। इससे चुनाव में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं और स्थानीय स्तर पर गुटबाजी भी खुलकर सामने आ रही है।

चुनाव का मुख्य आधार विकास, जनसेवा और पंचायत स्तर की समस्याओं का समाधान बनकर उभरा है। सड़कों की स्थिति, पीने के पानी की उपलब्धता, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूलों की दशा, आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था, मनरेगा जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन—ये सभी मुद्दे जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुके हैं। मतदाता अब परंपरागत रिश्तों से इतर काम और ईमानदारी की कसौटी पर प्रत्याशियों का मूल्यांकन करने लगे हैं।

हालांकि पंचायत चुनाव को गैर-राजनीतिक माना जाता है, लेकिन धरातल पर हकीकत यह है कि भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के समर्थित उम्मीदवार और कार्यकर्ता पूरे दमखम से चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं। भाजपा ने संगठन स्तर पर बूथ समितियों और शक्ति केंद्रों को पंचायत चुनाव में सक्रिय कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने पुराने पंचायत प्रतिनिधियों को साथ जोड़कर गांव-गांव बैठकें शुरू कर दी हैं। ये चुनाव राजनीतिक दलों के लिए 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का भी आधार बनेंगे, इसलिए संगठनात्मक रूप से इसे काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।

युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बार के पंचायत चुनावों की एक विशेषता होगी। आरक्षण और सामाजिक जागरूकता के प्रभाव से महिलाएं अब सिर्फ परछाईं नहीं, स्वयं नेतृत्व की भूमिका में उतर रही हैं। गांवों में महिला स्वयं सहायता समूहों और पंचायत सशक्तिकरण कार्यक्रमों के चलते महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अब खुलकर अपने लिए प्रचार कर रही हैं और निर्णय लेने की भूमिका में नजर आ रही हैं। युवाओं की बात करें तो वे अपने नए विचारों और डिजिटल जानकारी के साथ पंचायत चुनाव को आधुनिक दृष्टिकोण दे रहे हैं। मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल पोस्टरों का उपयोग अब गांवों तक पहुंच चुका है, जिससे चुनाव प्रचार का तरीका भी बदलता जा रहा है।

वहीं प्रचार के पारंपरिक तरीकों जैसे घर-घर जाकर समर्थन मांगना, चौपाल बैठकों का आयोजन, स्थानीय मेलों और हाट बाजारों में जनसंपर्क अब भी जारी है। लेकिन इन सभी के साथ अब एक डिजिटल परत भी जुड़ गई है, जहां प्रत्याशी व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पेज और छोटे वीडियो के जरिए अपने वादे और उपलब्धियां जनता तक पहुंचा रहे हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान की जा रही है। पुलिस बल की तैनाती, उड़न दस्तों का गठन, आचार संहिता की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती, और सीसीटीवी से निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त नामांकन से लेकर मतदान और मतगणना तक की तारीखों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिससे प्रत्याशियों की गतिविधियों पर कानूनी दृष्टि से भी निगरानी रखी जाएगी।

यह चुनाव महज़ प्रतिनिधियों को चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि गांव की दिशा और दशा तय करने वाला जनादेश होगा। मतदाता न केवल अपने गांव के विकास की जिम्मेदारी सौंपेंगे, बल्कि पंचायत को एक नई सोच और नेतृत्व देंगे। जहां कुछ स्थानों पर जातीय समीकरण प्रभाव डाल सकते हैं, वहीं कई जगहों पर विकास, पारदर्शिता और ईमानदारी प्रमुख मुद्दा बनकर उभरे हैं।

उत्तराखण्ड जैसे राज्य में, जहां गांवों की सामाजिक संरचना अब भी मजबूत है, पंचायत चुनाव सामाजिक नेतृत्व, विकास की प्राथमिकताओं और जनता की असली नब्ज का प्रतिबिंब होता है। यहां के पंचायत चुनाव भविष्य की राजनीति की झलक भी देते हैं। इसलिए यह चुनावी रण केवल पदों का नहीं, बल्कि जनविश्वास और जनसेवा के लिए सच्ची कसौटी साबित होने वाला है।

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