13 करोड़ लोगों के हक पर संकट? SIR को लेकर कांग्रेस का बड़ा आरोप
नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के कारण करीब 13 करोड़ लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किए जाने का खतरा पैदा हो गया है। वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए वेणुगोपाल ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की खुली बहस की चुनौती स्वीकार करने से क्यों बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इस चुनौती का सामना इसलिए नहीं करना चाहते, क्योंकि उनके पास कांग्रेस द्वारा लगाए गए वोट चोरी और नागरिकों के अधिकारों के हनन के आरोपों का जवाब नहीं है।
वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा कि वे सामने आकर बताएं कि कथित तौर पर लाखों लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के दायरे से बाहर किए जाने की स्थिति क्यों पैदा हुई। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री में इन आरोपों का सार्वजनिक रूप से जवाब देने का साहस है? कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया के चलते 13 करोड़ लोगों के देश के कल्याणकारी नेटवर्क से बाहर होने की आशंका है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ आम नागरिकों को सरकारी सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित होने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उद्योगपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी की संपत्ति लगातार बढ़ रही है। वेणुगोपाल ने कहा कि देश में यह स्थिति ऐसे समय में देखने को मिल रही है, जब अडानी और अंबानी हर दिन अरबों डॉलर कमा रहे हैं।
दरअसल, चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने इस पूरी कवायद में पारदर्शिता और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
वहीं, राहुल गांधी भी चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ सार्वजनिक बहस की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूची से नाम हटने का असर केवल मतदान के अधिकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जरूरतमंद लोगों की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है।