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C.J.I की टिप्पणी के बाद वायरल हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’, X अकाउंट बैन

मुख्य न्यायाधीश की हालिया टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुआ व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन “कॉकरोच जनता पार्टी” अचानक चर्चा का केंद्र बन गया है। मीम्स, कटाक्ष, वायरल रील्स और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए उभरे इस डिजिटल अभियान ने बेहद कम समय में बड़ी ऑनलाइन लोकप्रियता हासिल कर ली।

“@cockroachjantaparty” नाम से चल रहे इंस्टाग्राम अकाउंट ने मात्र पांच दिनों के भीतर 10 मिलियन यानी एक करोड़ फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया। इसके साथ ही इस पेज ने फॉलोअर्स के मामले में भाजपा के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को भी पीछे छोड़ दिया। फिलहाल भाजपा के इंस्टाग्राम अकाउंट पर लगभग 87 लाख फॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस के आधिकारिक अकाउंट पर करीब 1.32 करोड़ फॉलोअर्स मौजूद हैं। वहीं 2012 में स्थापित आम आदमी पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर लगभग 19 लाख फॉलोअर्स हैं।

यह ऑनलाइन आंदोलन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक ऐसा मंच बन गया, जहां लोग विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी नाराजगी और निराशा व्यंग्यात्मक अंदाज में व्यक्त कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसकी तेजी से बढ़ती मौजूदगी ने इसे मीम कल्चर और राजनीतिक टिप्पणी के नए प्रतीक के रूप में स्थापित कर दिया।

इस ट्रेंड पर कई सार्वजनिक हस्तियों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। यूट्यूबर Dhruv Rathee, वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan और Mahua Moitra ने इस ऑनलाइन अभियान को लेकर टिप्पणी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस नेता Kirti Azad ने भी इस व्यंग्यात्मक आंदोलन से जुड़ने में रुचि दिखाई है।

प्रशांत भूषण ने कहा कि “कॉकरोच जनता पार्टी” को मिल रहे व्यापक ऑनलाइन समर्थन का इस्तेमाल केवल मीम्स तक सीमित न रहकर जनहित के गंभीर मुद्दों को उठाने के लिए भी किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से NEET पेपर लीक विवाद, युवाओं के रोजगार अधिकार और बेरोजगारी सहायता जैसे मुद्दों पर जवाबदेही और व्यापक चर्चा की मांग की।

उन्होंने X पर किए गए एक पोस्ट में कहा कि यदि इस तरह के डिजिटल प्लेटफॉर्म का समझदारी और रचनात्मक तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह जनमत को प्रभावित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होना हमेशा वास्तविक राजनीतिक ताकत या जमीनी संगठनात्मक क्षमता में तब्दील नहीं होता।

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