उत्तराखंड में मदरसों पर सख्ती, बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की तैयारी
देहरादून: उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था समाप्त होने और नई शैक्षणिक व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मदरसों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जो तय मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं और राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेने की प्रक्रिया से दूर हैं। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मान्यता के नियमों और निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों का प्रदेशभर में निरीक्षण किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है। सोमवार को ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर क्षेत्र में एक मदरसे को सील किया गया था। इसके बाद मंगलवार को भी प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखते हुए एक अन्य मदरसे को सील कर दिया। वहीं एक अन्य मदरसे को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज और मान्यता से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद उन संस्थानों में भी हलचल तेज हो गई है, जो लंबे समय से बिना मान्यता या निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए संचालित हो रहे हैं।
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि प्रदेश में चल रहे मदरसों का निरीक्षण किया जाएगा और जो संस्थान सरकार तथा शिक्षा विभाग की ओर से तय किए गए मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि यह कार्रवाई केवल रुद्रपुर या किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेशभर में ऐसे मदरसों की स्थिति की जांच की जाएगी। निरीक्षण के दौरान संस्थानों की मान्यता, शैक्षणिक व्यवस्था, बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और अन्य निर्धारित मानकों की जांच की जाएगी।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में पहले मदरसा बोर्ड के माध्यम से मदरसों की व्यवस्था संचालित होती थी, लेकिन अब राज्य में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है। इसके स्थान पर एक जुलाई 2026 से राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहने का अवसर देने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा भी उपलब्ध हो, ताकि वे भविष्य की प्रतिस्पर्धा और बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
प्राधिकरण के अध्यक्ष के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी संबंधित संस्थानों के लिए शिक्षा विभाग से मान्यता लेना आवश्यक है। हालांकि जांच के दौरान यह सामने आया है कि राज्य में कई मदरसे अब तक न तो नई व्यवस्था के तहत मान्यता ले रहे हैं और न ही मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन कर रहे हैं। ऐसे संस्थानों को लेकर प्रशासन गंभीर है और उनसे तय प्रक्रिया पूरी करने को कहा जा रहा है। जो संस्थान नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
डॉ. गांधी ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा किसी भी संस्था को अनावश्यक रूप से बंद करना नहीं है। सरकार का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार करना और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना है। इसके लिए जरूरी है कि सभी शिक्षण संस्थान तय नियमों और मानकों के अनुसार संचालित हों। सरकार चाहती है कि समाज के हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा मिल सके। इसी उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की गई है।
उन्होंने मदरसा संचालकों से अपील की कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी जरूरी मानकों को पूरा करें और शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करें। यदि किसी संस्थान को मान्यता से संबंधित नियमों, दस्तावेजों या प्रक्रिया में कोई समस्या है, तो उसे समय रहते संबंधित विभाग से संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई पूरी करनी चाहिए। प्रशासन का कहना है कि नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, लेकिन बिना मान्यता और मानकों के संचालित होने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासन की ओर से शुरू की गई कार्रवाई के बाद अब प्रदेशभर के मदरसों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में विभिन्न जिलों में निरीक्षण अभियान तेज होने की संभावना है। जांच के दौरान जिन संस्थानों में कमियां पाई जाएंगी, उन्हें पहले नियमों के अनुसार आवश्यक सुधार के लिए निर्देश या नोटिस दिया जा सकता है। इसके बावजूद मानकों को पूरा न करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानून और नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाना और उन्हें आधुनिक शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी बच्चे की शिक्षा केवल सीमित दायरे तक न रहे और उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें। ऐसे में मदरसों को भी नई व्यवस्था के अनुसार अपने शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करना होगा और मान्यता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रदेश में बिना मान्यता संचालित मदरसों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई को इसी व्यापक शैक्षणिक सुधार और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।