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योजनाओं से नहीं, अधिकारों के सम्मान से होता है सशक्तिकरण: राष्ट्रपति

नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित आदिवासी समुदाय के लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चा सशक्तिकरण केवल योजनाओं या नीतियों से नहीं आता, बल्कि यह तब संभव होता है जब लोगों के अधिकारों को स्वीकार और सम्मान किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी समुदायों को स्वयं जिम्मेदारी उठाते हुए अपने विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान और उनकी समृद्ध संस्कृति देश की धरोहर है, जिसे संरक्षित और संवर्धित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज और देश का विकास तभी संभव है जब उसमें समानता, न्याय और सम्मान का वातावरण हो। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर सभी को मिलकर एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया जहां आदिवासी संस्कृति और परंपराएं संरक्षित रहें और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में प्रौद्योगिकी एक सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए आदिवासी समाज को उनकी विशिष्ट पहचान बनाए रखते हुए मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक साधनों का प्रयोग करते हुए आदिवासी समुदाय अपने पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति को भी संरक्षित कर सकता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने वन अधिकार अधिनियम का विशेष उल्लेख किया और कहा कि यह अधिनियम सामाजिक न्याय, समानता और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। इस कानून ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने और उन्हें संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण योजनाओं के लाभों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह तब आता है जब लोगों के अधिकारों को स्वीकार किया जाए और उनका सम्मान किया जाए। यह सशक्तिकरण आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधित्व से और मजबूत होता है, क्योंकि उनकी सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व ही उनके विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि आदिवासी समुदायों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर और अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि आदिवासी समाज अपनी परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित रखते हुए जिम्मेदारीपूर्वक विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा, तो न केवल उनका बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल होगा।

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