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गंभीरा पुल हादसे ने खोली बुनियादी ढांचे की पोल, सरकार ने जताया शोक

वडोदरा : जिले में 9 जुलाई 2025 को एक भयावह दुर्घटना उस समय हुई, जब महिसागर नदी पर स्थित गंभीरा पुल अचानक ढह गया। यह दुर्घटना सुबह लगभग 7:30 बजे पादरा तालुका के मुजपुर गांव के पास घटी, जिससे पुल से गुजर रहे चार वाहन—दो ट्रक और दो वैन—सीधे नदी में जा गिरे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि लगभग दस लोगों को बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। अब तक चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि अन्य लापता लोगों की तलाश तेजी से जारी है। नदी में बहे हुए वाहनों और संभवतः फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए गोताखोरों और विशेष बचाव उपकरणों की मदद ली जा रही है।

गंभीरा पुल, जो कि वडोदरा जिले के पादरा को आणंद जिले से जोड़ता है, लगभग 45 वर्ष पुराना था और स्थानीय निवासियों के अनुसार यह लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। कई बार इसकी मरम्मत की मांग की जा चुकी थी, लेकिन इसे लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। अब यह हादसा सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या समय रहते इसकी स्थिति का मूल्यांकन किया गया था या नहीं।

स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल को चारों ओर से घेर लिया है ताकि बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए। साथ ही नदी के उस हिस्से में जल यातायात पर भी रोक लगा दी गई है। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और पूरी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा बेहद अचानक हुआ। जैसे ही एक ट्रक पुल के मध्य भाग तक पहुंचा, पुल की संरचना कमजोर होकर टूट गई और देखते ही देखते पूरा हिस्सा नदी में समा गया। पीछे से आ रही अन्य गाड़ियाँ भी उसकी चपेट में आ गईं। हादसे के समय घना यातायात नहीं था, अन्यथा यह त्रासदी और भी विकराल हो सकती थी।

राज्य सरकार ने इस दुर्घटना को गंभीरता से लिया है और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। साथ ही घायलों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। पुल हादसे की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति गठित की गई है, जो यह मूल्यांकन करेगी कि पुल के गिरने के पीछे क्या तकनीकी या प्रशासनिक चूक जिम्मेदार थी।

वडोदरा पुल हादसा एक बार फिर बुनियादी ढांचे की निगरानी और समय पर रखरखाव की गंभीरता को सामने लाता है। यह घटना न केवल अनेक परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि देश भर में पुराने पुलों और सार्वजनिक संरचनाओं की समय-समय पर जांच और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है। जब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, ऐसे हादसे दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा। फिलहाल, बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और पूरा प्रशासनिक तंत्र प्रभावितों को राहत पहुंचाने में जुटा हुआ है।

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