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उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में जियो थर्मल नीति को मिली मंजूरी

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज उत्तराखंड मंत्रिमंडल की अहम बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें राज्य के विकास, प्रशासनिक ढांचे और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। बैठक में ऊर्जा, खनन, कर प्रशासन, पुलों की संरचनात्मक मजबूती तथा पेंशन नीति जैसे विविध क्षेत्रों को लेकर प्रस्ताव लाए गए, जिन पर मंत्रिमंडल ने मुहर लगा दी।

बैठक की सबसे प्रमुख उपलब्धि राज्य की जियो थर्मल नीति को मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलना रही। इस नीति के माध्यम से राज्य में अक्षय ऊर्जा स्रोतों के दोहन को बढ़ावा दिया जाएगा। जियो थर्मल ऊर्जा, जो भूगर्भीय ऊष्मा से प्राप्त होती है, न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि पर्वतीय राज्यों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। इस नीति से राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तराखंड एक नया मुकाम हासिल कर सकता है।

इसके अलावा, राज्य में पुलों की क्षमता बढ़ाने और संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) की स्थापना को मंजूरी दी गई है। यह इकाई राज्य में पुराने पुलों की मरम्मत, नए पुलों के निर्माण, और संपूर्ण निगरानी के कार्यों को प्रभावी रूप से संचालित करेगी, जिससे परिवहन व्यवस्था को और सुरक्षित एवं सुगम बनाया जा सकेगा।

सतर्कता विभाग को और अधिक सशक्त एवं दक्ष बनाने के लिए उसके ढांचे में 20 नए पदों को स्वीकृति दी गई है। इससे विभाग में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 132 से बढ़ाकर 156 कर दी गई है। यह विस्तार विभागीय जांच और भ्रष्टाचार नियंत्रण के कार्यों में अधिक प्रभावशीलता लाएगा।

वाणिज्यिक कर (GST) विभाग के ढांचे को भी मजबूती प्रदान करते हुए उसमें नए पदों की स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय जीएसटी संग्रहण, कर अनुपालन और कर प्रशासन को और बेहतर करने के उद्देश्य से लिया गया है।

खनन क्षेत्र में भी एक बड़ा निर्णय लिया गया है। अब राज्य और जिलों में नए खनिजों के दोहन और विकास के लिए खनन न्यास (Mining Trust) बनाए जाएंगे। ये न्यास स्थानीय विकास, पर्यावरणीय संतुलन और खनन कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्य करेंगे।

सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी मंत्रिमंडल ने एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी है। अब यदि वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने वाले किसी व्यक्ति का पुत्र 18 वर्ष का हो जाता है, तो उस कारण से उसकी पेंशन बंद नहीं की जाएगी। पहले की व्यवस्था में जैसे ही लाभार्थी का पुत्र 18 वर्ष का होता था, पेंशन बंद कर दी जाती थी। इस नीति में संशोधन कर सरकार ने बुजुर्गों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।इन सभी निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में सुधार की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। कैबिनेट की यह बैठक बहुआयामी विकास और लोकहित से जुड़े अनेक पहलुओं को समाहित करने वाली साबित हुई है।

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