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सरकारी फैसलों पर न्यायिक समीक्षा से आती है पारदर्शिता: गडकरी

नागपुर: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोक प्रशासन में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए सरकार के खिलाफ अदालत में याचिकाएं दाखिल करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। नागपुर में आयोजित स्वर्गीय प्रकाश देशपांडे स्मृति कुशल संगठक पुरस्कार समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि अदालतों के आदेश ऐसे कई कार्यों को संभव बना सकते हैं जो सरकार के लिए भी असंभव होते हैं।

गडकरी ने कहा कि समाज में कुछ ऐसे जागरूक और जिम्मेदार लोग होने चाहिए जो जनहित में सरकार के फैसलों को अदालत में चुनौती दें। इससे लोकतांत्रिक प्रणाली में संतुलन बना रहता है और मंत्रियों एवं राजनेताओं में अनुशासन आता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रिय राजनीति के दबाव में कई बार मंत्री और जनप्रतिनिधि जरूरी निर्णय नहीं ले पाते, जबकि अदालती हस्तक्षेप से ऐसी स्थितियों में भी सुधार संभव होता है।

उन्होंने बताया कि समारोह में सम्मानित किए गए ‘कुशल संगठकों’ ने शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकारी फैसलों के खिलाफ कई बार अदालत का दरवाजा खटखटाया और कई मामलों में सरकार को अपने निर्णय वापस लेने पड़े। उन्होंने इसे लोकतंत्र की शक्ति का प्रतीक बताया।

इस अवसर पर गडकरी ने रूस-यूक्रेन और इजराइल-ईरान संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व की महाशक्तियों की तानाशाही प्रवृत्ति के कारण आज समन्वय, सद्भाव और प्रेम जैसे मूल्य कमजोर हो रहे हैं और दुनिया एक गंभीर संघर्ष की ओर बढ़ रही है। उन्होंने भारत को बुद्ध की भूमि बताते हुए कहा कि भारत को विश्व को शांति, सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

गडकरी ने कहा कि युद्धों से जुड़ी तकनीकी प्रगति ने मानवता के सामने गंभीर संकट खड़े कर दिए हैं, जिससे यह आशंका भी बनी हुई है कि भविष्य में कभी भी विश्व युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने ऐसे वैश्विक हालातों के मद्देनज़र भविष्य की नीति निर्धारण के लिए विचार और समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

 

 

 

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