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भेदभाव और हिंसा के मुद्दे पर संघ-भाजपा घिरी, मनोज झा का आरोप

राजनीतिक हलकों में एक बार फिर आरएसएस और भाजपा की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने गुरुवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि हिंसा, नस्लीय और भाषाई भेदभाव जैसी घटनाओं पर संघ नेतृत्व की चुप्पी चिंताजनक है। उन्होंने उत्तराखंड में त्रिपुरा के एक छात्र की हत्या को इस “चयनात्मक मौन” का ताजा और गंभीर उदाहरण बताया।

मनोज झा ने कहा कि मोहन भागवत के हालिया बयानों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि उनकी विचारधारा से प्रेरित राजनीतिक शक्ति देश में शासन कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संघ प्रमुख समाज में जिम्मेदारी, सद्भाव और संविधान की बात करते हैं, तब उन्हीं के प्रभाव वाले राज्यों में हो रही हिंसक घटनाओं पर उनकी स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं आती। झा के मुताबिक, संघ और भाजपा के बीच वैचारिक संबंध से इनकार नहीं किया जा सकता, ऐसे में नैतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

उत्तराखंड के देहरादून में हुई घटना का उल्लेख करते हुए झा ने कहा कि त्रिपुरा के एक युवा छात्र की निर्मम हत्या हुई, लेकिन इस पर संघ प्रमुख का कोई बयान सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लंबे समय से भाषाई और नस्लीय विभाजन का माहौल बनाया जा रहा था, तब संघ नेतृत्व मौन रहा। झा ने कहा, “अब वही जहर समाज के हर हिस्से में फैल चुका है, हर सांस के साथ लोग उसे महसूस कर रहे हैं।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरएसएस अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में कार्यक्रम और सभाएं आयोजित कर रहा है। हाल ही में मोहन भागवत ने हिंदू सम्मेलनों को शक्ति प्रदर्शन की बजाय जिम्मेदारी का क्षण बताते हुए भेदभाव खत्म करने, भाषाई विविधता के सम्मान और संविधान के पालन की बात कही थी। इसी संदर्भ में विपक्षी दलों का कहना है कि बयान और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

विवाद की जड़ बनी त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र अंजेल चकमा की हत्या ने इस बहस को और गहरा कर दिया है। 9 दिसंबर को देहरादून में कथित तौर पर चाकू और धारहीन हथियारों से लैस एक समूह ने अंजेल पर हमला किया था। गंभीर रूप से घायल छात्र की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में आक्रोश और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

उत्तराखंड पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के अनुसार, घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज जब्त कर उसका विश्लेषण किया जा रहा है। अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी यज्ञ राज अवस्थी फरार है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले को एक लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की है।

यह पूरा मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक बहस का रूप ले चुका है। विपक्ष इसे बढ़ती असहिष्णुता और सत्ता संरचनाओं की चुप्पी से जोड़ रहा है, जबकि सत्तापक्ष और संघ से जुड़े संगठन इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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