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राजमार्ग नहीं, मौत का रास्ता: सड़क किनारे खड़े वाहन ले रहे जानें

देहरादून : दून क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों के किनारे अवैध रूप से खड़े ट्रक और कंटेनर जानलेवा बनते जा रहे हैं। सड़कों पर बेतरतीब खड़े ये भारी वाहन आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, लेकिन पुलिस और परिवहन विभाग की चुप्पी चिंता का विषय है।

लगातार बढ़ रही दुर्घटनाएं, प्रशासन बेपरवाह
हाल ही में विकासनगर क्षेत्र में पंजाब निवासी युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इससे पहले अक्टूबर 2023 में सेंट्रियो माल के बाहर खड़े कंटेनर से टकराकर सेना के एक कैप्टन की जान चली गई थी।
दिसंबर 2024 में सुद्धोवाला में ट्रक से टकराकर एक छात्र की जान चली गई, जबकि ओएनजीसी चौक पर नवंबर 2024 में कंटेनर से टकराने से छह युवाओं की मौत हो गई थी। ये केवल कुछ उदाहरण हैं जो बताते हैं कि किस तरह अवैध पार्किंग ने मौत का मंजर बना दिया है।

हर राजमार्ग बना बाजार, ट्रक-कंटेनरों का जमावड़ा
दून-हरिद्वार, दून-सहारनपुर-दिल्ली और दून-पांवटा जैसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर बाजारों और ढाबों के बाहर भारी वाहनों की कतारें आम हो चुकी हैं। कहीं ट्रकों की मरम्मत हो रही है तो कहीं ढाबों पर आराम फरमा रहे हैं चालक। दिन हो या रात, सड़क के किनारे खड़े ये वाहन हर गुजरते पल में एक नई दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।

रात में और भी खतरनाक हालात
रात के समय जब दृश्यता कम होती है, ऐसे वाहनों में न पार्किंग लाइट होती है, न रेडियम टेप। पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहन सीधे इनमें जा भिड़ते हैं। पुलिस की गश्त के निर्देश केवल कागजों में सिमट कर रह गए हैं।

सरिया और गार्डर से भरे ट्रक बने मौत के जाल
अक्सर देखा गया है कि ट्रकों में क्षमता से अधिक लदा माल, खासकर लोहे के सरिए और गार्डर, बाहर तक निकले रहते हैं। इससे टकराकर कई वाहन चालक जान गंवा चुके हैं। यह साफ दर्शाता है कि परिवहन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नदारद है।

इन स्थानों पर सबसे ज्यादा खतरा
हरिद्वार बाईपास, सेलाकुई, आशारोड़ी, ट्रांसपोर्टनगर और रामपुर क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील हैं। यहां के ढाबों के बाहर ट्रकों की अवैध कतारें बनी रहती हैं, जिससे लगता है मानो यह पार्किंग ज़ोन हो।

नियंत्रण के लिए ठोस कार्रवाई की दरकार
सड़क सुरक्षा के नाम पर सेमिनार और गोष्ठियाँ तो होती हैं, लेकिन असल मुद्दे—राजमार्गों पर ट्रकों की अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग—पर कोई कार्यवाही नहीं होती। आवश्यकता है कि पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर इन वाहनों पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि निर्दोष लोगों की जानें बचाई जा सकें।

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