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उत्तराखंड में मानसून के बाद भी बारिश, 9 जिलों में बिजली गिरने का अलर्ट

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। प्रदेश के पर्वतीय जिलों से लेकर मैदानी इलाकों तक बारिश और ओलावृष्टि का असर देखने को मिल रहा है। बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सुबह और शाम के समय ठंडक बढ़ने लगी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार को भी प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के नौ जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, शनिवार को देहरादून, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इसके अलावा प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, 3,500 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने के आसार जताए गए हैं। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड का असर और बढ़ सकता है।

मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर जारी

आमतौर पर मानसून की विदाई के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगती है, लेकिन उत्तराखंड में इस बार मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं हुआ है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रुक-रुककर बारिश होने से तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। पर्वतीय इलाकों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संभावित बर्फबारी के कारण मौसम में ठंडक बढ़ रही है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में भी सामान्य से कम तापमान दर्ज किए जाने से लोगों को बदलते मौसम का एहसास होने लगा है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्री क्षेत्रों से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में मौसम संबंधी गतिविधियां सक्रिय हैं। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र के आसपास उत्पन्न होने वाली मौसम प्रणालियों से जुड़ा होता है, जो उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर सकता है। जब इन प्रणालियों को पर्याप्त नमी मिलती है, तो बादल बनने के साथ बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की परिस्थितियां बन सकती हैं। यही वजह है कि मानसून की विदाई के बाद भी उत्तराखंड में बारिश का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है।

नौ जिलों में बिजली चमकने और तेज हवाओं का अलर्ट

मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के नौ जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। देहरादून, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं। मौसम में अचानक बदलाव के दौरान लोगों को खुले स्थानों और असुरक्षित इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का असर अधिक दिखाई दे सकता है। ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी के कारण तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम संबंधी पूर्वानुमान पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। विशेषकर खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना और सुरक्षित स्थानों पर रहना बेहतर होगा।

सामान्य से नीचे पहुंचा तापमान

प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी कम रहा, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी कम से लेकर अत्यंत कम स्तर पर दर्ज किया गया। बारिश और ठंडी हवाओं के चलते मौसम में ठंडक बढ़ गई है। आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियों के आधार पर तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

राजधानी देहरादून में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री कम था। वहीं, न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा। शनिवार को शहर में दिन के समय आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। दोपहर बाद या शाम के समय गरज वाले बादल विकसित होने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, देहरादून का अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

मौसम को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्तूबर में मानसून की विदाई का अर्थ यह नहीं है कि बारिश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में पर्याप्त नमी होने पर कम समय में तेज बारिश, ओलावृष्टि और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की स्थिति बन सकती है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान, वातावरण में नमी और वर्षा की तीव्रता से जुड़े जोखिमों में भी बदलाव आ सकता है।

मौसम में लगातार हो रहे बदलाव को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेनी चाहिए। वहीं, गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों में रुकने से बचना चाहिए। फिलहाल प्रदेश में बारिश और ठंड का असर बने रहने की संभावना है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से सर्दी का एहसास और बढ़ सकता है।

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