Wed. Apr 22nd, 2026

मतदाता सूची जांच में आधार-राशन कार्ड को शामिल करने की सुप्रीम कोर्ट की सलाह

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस और राजद पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया। सिन्हा ने कहा कि विपक्षी दल अब उन अवैध घुसपैठियों को भी वोट बैंक के रूप में पालना चाहते हैं, जिन्होंने बिहार में अराजकता फैलाने का काम किया है।

उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि चुनाव आयोग पारदर्शी तरीके से अपने कार्य को अंजाम दे रहा है और सुप्रीम कोर्ट ने भी आयोग को विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को शामिल किया जाना न्यायसंगत होगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अपनी राय में कहा है कि इससे सत्यापन प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय होगी।

विजय सिन्हा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष एक ओर संविधान में विश्वास का दावा करता है, और दूसरी ओर उन्हीं संवैधानिक संस्थाओं — जैसे चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट — का निरंतर अपमान करता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हम स्वागत करते हैं और हमें न्यायालय की प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को लोकतंत्र के लिए राहत की बात बताया और कहा कि अदालत का सुझाव महत्वपूर्ण है, और उन्हें विश्वास है कि चुनाव आयोग इसे स्वीकार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की है।

राजनीतिक गलियारों में यह मामला अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर सरकार इसे मतदाता सूची को पारदर्शी और शुद्ध करने की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे भय और भेदभाव की राजनीति करार दे रहा है। बिहार की राजनीति में यह मामला आगामी चुनावों को देखते हुए और भी संवेदनशील बन गया है।

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