होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से तेल-गैस आपूर्ति पर संकट गहराया
Iran पर अमेरिका और Israel के समन्वित हमलों के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं, जिसका सीधा असर सोमवार को वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। Hormuz Strait से तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। अमेरिकी कच्चा तेल 7.6 प्रतिशत उछलकर 72.12 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 8.6 प्रतिशत बढ़कर 79.11 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
यूरोप में प्राकृतिक गैस वायदा कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण यह है कि एलएनजी की अहम आपूर्तिकर्ता Qatar ने संघर्ष की स्थिति के चलते उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। तेल की ऊंची कीमतों का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है, जहां पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। ऐसे समय में जब कई देश पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं, ऊर्जा कीमतों में उछाल अन्य वस्तुओं की लागत भी बढ़ा सकता है। आंकड़ा विश्लेषण कंपनी Kpler ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि उपग्रह नेविगेशन प्रणालियों में व्यवधान के कारण टैंकरों की आवाजाही में भारी कमी आई है।
उधर UK Maritime Trade Operations ने जलडमरूमध्य के दोनों ओर कई जहाजों पर हमलों की सूचना दी है। कारोबारियों को आशंका है कि ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति धीमी पड़ सकती है या पूरी तरह बाधित हो सकती है। खासकर फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश मार्ग से गुजर रहे दो जहाजों पर हमले के बाद निर्यात क्षमता प्रभावित होने की चिंता गहरा गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में हमले लंबे समय तक जारी रहे तो कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी Rystad Energy के अनुसार प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल, यानी वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह मार्ग विश्व का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट’ माना जाता है। जलडमरूमध्य के उत्तर में ईरान स्थित है, जबकि इसी रास्ते से Saudi Arabia, Kuwait, Iraq, Qatar, Bahrain, United Arab Emirates और ईरान का तेल एवं गैस निर्यात होता है। फरवरी के मध्य में ईरान ने सैन्य अभ्यास का हवाला देते हुए जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद किया था, जिसके बाद तेल कीमतों में लगभग छह प्रतिशत की तेजी आई थी।
इस बीच तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस के आठ सदस्यों ने उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन OPEC ने कहा है कि वह अप्रैल में प्रतिदिन 2,06,000 बैरल उत्पादन बढ़ाएगा। उत्पादन बढ़ाने वाले देशों में Saudi Arabia, Russia, Iraq, United Arab Emirates, Kuwait, Kazakhstan, Algeria और Oman शामिल हैं। रिस्टैड एनर्जी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जॉर्ज लियोन के मुताबिक, यदि खाड़ी क्षेत्र में आवाजाही बाधित होती है तो अतिरिक्त उत्पादन से तत्काल राहत सीमित ही रहेगी।
ईरान प्रतिदिन लगभग 16 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। यदि यह निर्यात प्रभावित होता है तो China को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव यदि जल्द कम नहीं हुआ तो ऊर्जा कीमतों में और तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।