अमेरिका-इज़राइल हमले की गूंज कश्मीर तक, 75 जगहों पर प्रदर्शन
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में मौत के बाद कश्मीर घाटी में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी घाटी में कड़े प्रतिबंध लागू रहे। अगस्त 2019 के बाद यह पहला अवसर है जब कश्मीर में इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
एहतियात के तौर पर सोमवार (2 मार्च, 2026) को दो दिनों के लिए शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया और मोबाइल इंटरनेट की स्पीड कम कर दी गई। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार (3 मार्च, 2026) को सुरक्षा बलों के काफिलों की सभी आवाजाही रद्द कर दी गई, क्योंकि कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। तनाव कम करने के लिए प्रशासन ने किसी भी रोड ओपनिंग पार्टी को तैनात नहीं करने का फैसला लिया।
सोमवार को हुए प्रदर्शनों में छह सुरक्षा कर्मियों समेत कम से कम 14 लोग घायल हुए। अधिकारियों के अनुसार, कश्मीर घाटी में विभिन्न स्थानों पर 75 रैलियां आयोजित की गईं, जबकि जम्मू क्षेत्र में भी कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है।
कश्मीर डिवीजन प्रशासन ने नागरिकों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। एक प्रवक्ता ने कहा कि घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सभी समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है। लोगों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केवल सत्यापित जानकारी साझा करने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में सहायता के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन (0194-2740003) भी शुरू की गई है।
पुलिस ने भी सभी वर्गों से हिंसा और उकसावे से दूर रहने की अपील की है और चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वालों तथा अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने सोमवार को एहतियातन लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाई, शैक्षणिक संस्थान बंद किए और मोबाइल इंटरनेट की गति सीमित कर दी।
शहर के प्रमुख इलाके लाल चौक स्थित घंटाघर को सील कर उसके चारों ओर बैरिकेड लगा दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने से रोकने के लिए शहर भर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। कई अहम चौराहों पर कंसर्टिना तार और बैरिकेड लगाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि ये सभी कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती तौर पर उठाए गए हैं।