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बर्फबारी के बीच हेमकुंड साहिब का मनमोहक नजारा, कल बंद होंगे कपाट

उत्तराखंड में मौसम के बदलते मिजाज के साथ चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। बर्फबारी के बाद हेमकुंड साहिब का नजारा अत्यंत मनमोहक दिखाई दे रहा है। कल यहां हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। मौसम खुलने के बाद यहां का वातावरण बेहद सुहावना बना हुआ है, लेकिन ठंड के बढ़ते असर के चलते यात्रा गतिविधियों में अब धीरे-धीरे विराम लगने लगा है।

गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने गोमुख, भोजबासा और तपोवन क्षेत्र में हुई ताजा बर्फबारी को देखते हुए ट्रैकिंग गतिविधियों पर दो दिन की अस्थाई रोक लगा दी है। बुधवार तक गोमुख-तपोवन ट्रैक पर गए सभी ट्रैकर्स सुरक्षित रूप से गंगोत्री लौट आए हैं। दो दिन हुई बर्फबारी के बीच ट्रैकर्स ने बर्फ के बीच रोमांचक ट्रैकिंग का अनुभव किया, जो उनके लिए अविस्मरणीय याद बन गया।

इसी बीच उत्तराखंड के चारों धामों और पंच केदारों के कपाट शीतकाल के लिए बंद करने की तिथियां तय कर दी गई हैं। विजयदशमी और भैया दूज के शुभ अवसर पर पंचांग गणना के बाद कपाट बंद होने के मुहूर्त घोषित किए गए। इस वर्ष चारधाम यात्रा का समापन 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ होगा।

यमुनोत्री धाम के कपाट 23 अक्टूबर को भैया दूज के शुभ पर्व पर दोपहर 12:30 बजे श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने से पहले शनिदेव महाराज की डोली अपनी बहन मां यमुना को विदा करने यमुनोत्री धाम पहुंचेगी। इसके बाद मां यमुना की डोली खरसाली गांव में अपने शीतकालीन प्रवास पर विराजमान होगी, जहां आगामी छह महीनों तक दर्शन किए जा सकेंगे।

गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को अन्नकूट पर्व के अवसर पर सुबह 11:36 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु मां गंगा के मुखबा गांव स्थित शीतकालीन मंदिर में दर्शन कर पाएंगे।

बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को दोपहर 2:56 बजे बंद किए जाएंगे। इससे पूर्व 21 नवंबर से पंच पूजाओं का शुभारंभ होगा। विजयदशमी के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल और वेदपाठी रविंद्र भट्ट ने पंचांग गणना के बाद तिथि की घोषणा की, जिसे मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी ने औपचारिक रूप से घोषित किया।

बर्फबारी और बदलते मौसम के बीच उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अब सर्दियों का आगमन स्पष्ट महसूस किया जा रहा है। भक्तों और यात्रियों के लिए यह मौसम भले ही ठंडक लेकर आए, लेकिन इन पवित्र धामों की शांत, सफेद चादर ओढ़े अद्भुत सुंदरता हर श्रद्धालु के मन को भक्ति और प्रकृति की एक नई अनुभूति से भर देती है।

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