ओलावृष्टि और तेज हवाओं के बीच दर्दनाक हादसा, मलबे में दबे 7 लोगों की गई जान
बेंगलुरु : राजधानी में मौसम ने अचानक खतरनाक रूप ले लिया, जब तेज हवाओं, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने पूरे शहर को प्रभावित कर दिया। इस प्राकृतिक कहर के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
शहर के व्यस्त इलाके में स्थित बोरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल की दीवार अचानक ढह गई। उस समय कई रेहड़ी-पटरी वाले, बच्चे और राहगीर बारिश से बचने के लिए उसी दीवार के पास खड़े थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह दीवार कुछ ही पलों में मौत का कारण बन जाएगी। देखते ही देखते दीवार भरभराकर गिर पड़ी और लोग मलबे में दब गए।
इस हादसे में एक छह साल की मासूम बच्ची सहित सात लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
इस दुखद घटना पर नरेन्द्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। सोशल मीडिया पर उन्होंने संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।
घटना की जानकारी मिलते ही सिद्धरमैया मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने साफ कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य चल रहा था और दीवार के सहारे मिट्टी डाली जा रही थी, जिससे उस पर अतिरिक्त दबाव पड़ा और वह कमजोर होकर गिर गई।
सरकार ने मृतकों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि सभी घायलों का इलाज मुफ्त में किया जाए। शुरुआती जानकारी में तीन बच्चों की मौत की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में स्पष्ट किया गया कि मृतकों में केवल एक बच्ची शामिल है।
उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी घटना पर दुख जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने शहर में कमजोर पेड़ों और ढांचों की पहचान कर उन्हें हटाने के निर्देश देने की बात कही, ताकि मानसून के दौरान इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो।
इस बीच, विपक्ष ने इस हादसे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। आर अशोक ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि इस दर्दनाक हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।