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उत्तराखंड में महाशिवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, हर-हर महादेव के जयघोष

देहरादून: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तराखंड के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचने लगे और हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर परिसरों में लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं, जहां हजारों की संख्या में शिवभक्त भगवान आशुतोष के दर्शन और जलाभिषेक के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। भक्तों ने पूरे विधि-विधान के साथ शिवलिंग पर गंगाजल, पंचामृत, सफेद पुष्प, बेलपत्र, आखा फूल, कमल गट्टा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

प्रदेशभर के प्रमुख शिवालयों में भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना का क्रम दिनभर चलता रहा। मंदिरों में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था और लोग पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना में लीन दिखाई दिए। इस अवसर पर पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व शिव और शक्ति की आराधना का प्रतीक है, जो जीवन में आध्यात्मिक जागरण, सकारात्मक ऊर्जा, प्रेम और एकता का संदेश देता है।

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत विशेष माना जा रहा है, क्योंकि कई वर्षों बाद एक साथ कई शुभ योग बन रहे हैं। कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात जैसे दुर्लभ योगों का संयोग बन रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की यह अनुकूल स्थिति भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत फलदायी मानी जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार भगवान शिव की त्रिगुणी सृष्टि मानी गई है और उनकी पूजा तीन प्रकार—सात्विक, राजसिक और तामसिक—रूपों में की जाती है। उन्होंने बताया कि जो भक्त जिस भाव और विधि से भगवान शिव की पूजा करता है, भगवान शिव उसे उसी अनुरूप फल प्रदान करते हैं। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग सामान्यतः सात्विक और राजसिक पूजा करते हैं। सात्विक पूजा में दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, पुष्प, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं, जबकि राजसिक पूजा में भांग, धतूरा, रुद्राक्ष और कमल पुष्प का विशेष महत्व होता है। वहीं तामसिक पूजा और अघोर साधना में भस्म की आरती और भस्म से श्रृंगार कर भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन किए गए सभी प्रकार के पूजन और साधना का विशेष महत्व होता है और यह भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करता है। इस शुभ अवसर पर प्रदेशभर में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय संगम देखने को मिला, जहां हर ओर भगवान भोलेनाथ के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।

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