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तीर्थयात्रियों से भरी बस नदी में समाई, राहत-बचाव अभियान जारी

देहरादून :चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड में एक बड़ा हादसा सामने आया है जिसने तीर्थयात्रा की कठिनाइयों और जोखिमों की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। भारी बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच श्रद्धालु अपनी यात्रा पर निकले हैं, लेकिन प्रकृति की अनदेखी और मानवीय चूक एक बड़े हादसे का कारण बन गई। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रुद्रप्रयाग और गौचर के बीच घोलतीर गांव के पास बृहस्पतिवार तड़के एक मिनी बस अनियंत्रित होकर सीधे अलकनंदा नदी में जा गिरी। इस बस में कुल 20 यात्री सवार थे जिनमें से दो की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि 10 यात्री अब भी लापता हैं।

इस हादसे की खबर मिलते ही रुद्रप्रयाग पुलिस और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। हादसे में आठ यात्री घायल हुए हैं जिन्हें तत्काल उपचार के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त मिनी बस में राजस्थान के उदयपुर का एक परिवार भी सवार था जो चारधाम यात्रा पर आया हुआ था।

घटना के वक्त मिनी बस बदरीनाथ धाम की ओर जा रही थी और उसमें चालक समेत कुल 20 लोग सवार थे। बस की क्षमता 31 यात्रियों की थी, लेकिन हादसे के वक्त उसमें अपेक्षाकृत कम लोग सवार थे। बताया गया है कि हादसे के दौरान कुछ यात्री बस से उछलकर सड़क किनारे पहाड़ी पर ही गिर पड़े जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, पर उनकी जान बच गई।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक दो शवों को नदी से बरामद किया गया है जबकि बाकी दस श्रद्धालुओं की तलाश जारी है। नदी का तेज बहाव राहत कार्यों में बाधा बन रहा है लेकिन बचाव दल और स्थानीय लोग लगातार लापता यात्रियों की खोज में जुटे हुए हैं। अलकनंदा जैसी तेज धार वाली नदी में गिरे यात्रियों की खोज चुनौतीपूर्ण है, लेकिन प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक हर यात्री का पता नहीं चल जाता, तब तक खोज और राहत अभियान जारी रहेगा।

यह घटना न केवल तीर्थयात्रा की कठिनाइयों की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी बताती है कि यात्रा के दौरान सावधानी और सुरक्षा मानकों का पालन कितना आवश्यक है। मानसून के दौरान उत्तराखंड की सड़कें अत्यंत संवेदनशील हो जाती हैं और ऐसे समय में यात्रियों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने श्रद्धालुओं से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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