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23 साल बाद बना संक्रांति और एकादशी का दुर्लभ संयोग,गंगा घाटों पर उमड़े श्रद्धालु

हरिद्वार : माघ मकर संक्रांति स्नान पर्व की शुरुआत घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच हुई, लेकिन आस्था की गर्माहट के आगे मौसम की मार भी फीकी पड़ गई। तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हर की पैड़ी और गंगा के विभिन्न घाटों पर उमड़ पड़ी। ढोल-दमाऊं की गूंज के बीच देव डोलियों को श्रद्धापूर्वक घाटों तक लाया गया और विधि-विधान से गंगा स्नान कराया गया।

भीषण ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान, दान और पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। हर की पैड़ी पर विशेष गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मां गंगा से सुख-समृद्धि की कामना की।

23 साल बाद बना शुभ संयोग

इस वर्ष मकर संक्रांति पर एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करने और मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो करीब 23 वर्षों बाद बना है। ज्योतिष के अनुसार यह संयोग अत्यंत पुण्यकारी और शुभ फल देने वाला माना जा रहा है।

नारायण ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य आचार्य विकास जोशी के अनुसार बुधवार को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शास्त्रों में उत्तरायण काल को अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य देना और दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

उन्होंने बताया कि इस दिन सुबह 7 बजकर 31 मिनट से रात 3 बजकर 04 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग रहेगा। इसके साथ ही चतुर्ग्रही योग और वृद्धि योग भी बन रहा है, जिससे यह दिन और भी अधिक शुभ हो गया है।

स्नान-दान और पूजा का विशेष महत्व

ज्योतिषाचार्य के अनुसार मकर संक्रांति पर सुबह स्नान कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष फलदायी रहता है। जल में गुड़ या लाल फूल डालकर अर्घ्य देना शुभ माना गया है। तिल और गुड़ का दान, जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र या अनाज दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से भी विशेष लाभ बताया गया है।

मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर गंगा घाटों पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कोहरे और ठंड के बीच गंगा स्नान कर श्रद्धालुओं ने पुण्य अर्जित किया और पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया।

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