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बिकाजी के संस्थापक शिव रतन अग्रवाल का निधन, उद्योग जगत में शोक

चेन्नई : भारतीय पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन हो गया है। शिव रतन अग्रवाल, बिकाजी फूड्स इंटरनेशनल के संस्थापक और देश के प्रमुख उद्यमियों में से एक, का गुरुवार 23 अप्रैल 2026 को चेन्नई में निधन हो गया। 74 वर्षीय अग्रवाल ने एक छोटे क्षेत्रीय नमकीन कारोबार को वैश्विक पहचान दिलाकर भारतीय खाद्य उद्योग में एक अलग मुकाम स्थापित किया।

जानकारी के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से चेन्नई में अपनी पत्नी के साथ रह रहे थे, जिनकी हाल ही में बायपास सर्जरी हुई थी। पत्नी की देखभाल के चलते उन्होंने वहीं रुकने का निर्णय लिया था। डॉक्टरों ने उन्हें भी आराम की सलाह दी थी, लेकिन गुरुवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। बेचैनी महसूस होने पर उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

शिव रतन अग्रवाल का जन्म उस अग्रवाल परिवार में हुआ था जिसने प्रसिद्ध ब्रांड हल्दीराम की नींव रखी। वह गंगाबिशन हल्दीराम भुजियावाला के पोते थे। जहां उनके भाइयों ने पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ाया, वहीं उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया। वर्ष 1986 में उन्होंने ‘शिवदीप प्रोडक्ट्स’ के जरिए स्वतंत्र कारोबारी यात्रा शुरू की और 1993 में ‘बिकाजी’ ब्रांड लॉन्च किया। इस ब्रांड का नाम राव बीका के नाम पर रखा गया, जो बीकानेर के संस्थापक थे।

उनका उद्देश्य बीकानेर के पारंपरिक स्वाद, खासकर भुजिया, को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना था। आज बिकाजी के उत्पाद—भुजिया, नमकीन, मिठाइयां और रेडी-टू-ईट फूड—न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी लोकप्रिय हैं। उनकी दूरदृष्टि और गुणवत्ता पर जोर ने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अग्रवाल हमेशा संगठन के मार्गदर्शक रहे और उन्होंने पारंपरिक भारतीय स्वाद को आधुनिक व्यावसायिक रणनीतियों के साथ जोड़कर एक मजबूत ब्रांड खड़ा किया। उनकी नेतृत्व क्षमता और चुनौतियों का समाधान करने की योग्यता ने बिकाजी को उद्योग में अग्रणी बनाया।

अशोक गहलोत ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शिव रतन अग्रवाल ने बिकाजी के माध्यम से बीकानेरी भुजिया को वैश्विक पहचान दिलाई। उनका निधन न केवल उद्योग जगत, बल्कि राजस्थान के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।

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