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अवैध धर्मांतरण का सरगना छांगुर, दुबई-तुर्की कनेक्शन की जांच तेज

अवैध धर्मांतरण के मामलों में मुख्य आरोपी और कथित सरगना छांगुर उर्फ जमालुद्दीन के खिलाफ प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। शनिवार को प्रशासन ने छांगुर के भतीजे सबरोज के ठिकानों पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। यह निर्माण गैडास बुजुर्ग थाना क्षेत्र के रेहरा माफी में सरकारी जमीन पर किया गया था। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। प्रशासन की यह कार्रवाई छांगुर और उसके नेटवर्क के खिलाफ चल रही व्यापक जांच और दंडात्मक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।

छांगुर का नाम केवल अवैध धर्मांतरण में ही नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक गंभीर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में भी जुड़ता नजर आ रहा है। अब तक की जांच में सामने आया है कि उसने देशभर में अपने नेटवर्क के ज़रिये हजारों लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित या मजबूर किया। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, छांगुर ने करीब तीन हजार से अधिक लोगों को अपने गिरोह में शामिल किया और सुनियोजित ढंग से धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजाम दिया। इसके अतिरिक्त यह भी संदेह गहराता जा रहा है कि छांगुर के संबंध कुछ ऐसे संगठनों से भी रहे हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा माने जाते हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा छांगुर और उसके करीबियों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। कई बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन, विदेशी फंडिंग और संपत्तियों के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि छांगुर ने दुबई, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इन देशों से उसे अवैध फंडिंग मिली और क्या उसका इस्तेमाल देश के भीतर अशांति फैलाने और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने में हुआ।

देश के विभिन्न हिस्सों से छांगुर के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज हो रही हैं। कई जिलों में पीड़ित सामने आकर उसकी करतूतों का खुलासा कर रहे हैं। इनमें कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें धोखे से धर्मांतरण कराया गया, कुछ मामलों में लालच और भय का भी इस्तेमाल किया गया। अब जब प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई है, तब लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे खुलकर इस नेटवर्क की जानकारी साझा कर रहे हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि छांगुर ने खुद को बाबा की उपाधि देकर धार्मिक आड़ में अपने मंसूबों को अंजाम दिया। उसके चंगुल में आए कई लोग अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा की गई हालिया बुलडोजर कार्रवाई न केवल कानून का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त कदम है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि धर्म के नाम पर कोई भी व्यक्ति कानून को हाथ में नहीं ले सकता।

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। छांगुर और उसके पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा। आगे आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं जो इस संगठित गिरोह का हिस्सा रहे हैं। देश की एकता और अखंडता के विरुद्ध कार्य करने वाले ऐसे तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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