बुद्ध पूर्णिमा पर सीएम धामी का संदेश, करुणा और नैतिकता अपनाने का आह्वान
देहरादून : बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रदेश में श्रद्धा, आस्था और शांति का विशेष वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महात्मा बुद्ध का अहिंसा, करुणा और शांति का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पूर्व था। उन्होंने कहा कि यह संदेश केवल किसी एक समाज या देश के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है, जो जीवन को सही दिशा देने में सक्षम है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं हमें जीवन के मूल्यों को समझने और उन्हें व्यवहार में उतारने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने बताया कि आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों और तनावों से गुजर रहा है, तब बुद्ध के विचार हमें संयम, धैर्य और संतुलन बनाए रखने का मार्ग दिखाते हैं। उनका दर्शन केवल आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति की भी आधारशिला है।
उन्होंने आगे कहा कि महात्मा बुद्ध ने मानव जीवन में नैतिकता, सत्य और कर्तव्यपरायणता को सर्वोपरि माना। उनकी शिक्षाएं हमें यह सिखाती हैं कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि महात्मा बुद्ध ने विश्व कल्याण के लिए मैत्री, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा दिया। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के सभी को एकजुट रहने और एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव रखने का संदेश दिया। यह विचार आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब दुनिया को शांति और एकता की सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बुद्ध के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और समाज में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा का यह पावन पर्व हमें आत्मचिंतन का अवसर देता है, जिससे हम अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।अंत में मुख्यमंत्री ने सभी से यह अपेक्षा जताई कि वे इस अवसर पर न केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित रहें, बल्कि महात्मा बुद्ध के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारकर समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनाने में योगदान दें।