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दिल्ली को मिला नया प्रशासनिक केंद्र, कई मंत्रालय होंगे अब एक ही परिसर में

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश की राजधानी दिल्ली में नए प्रशासनिक ढांचे की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट परियोजना के अंतर्गत पहले भवन, कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया। इस अत्याधुनिक भवन को केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों को एक ही परिसर में एकत्रित कर दक्षता, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

कर्तव्य भवन-3 में अब गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, साथ ही प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) का कार्यालय संचालित होगा। यह नई व्यवस्था न केवल मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय को संभव बनाएगी, बल्कि पुरानी और बिखरी हुई व्यवस्थाओं से होने वाली असुविधाओं को भी खत्म करेगी।

इस नई पहल से नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को संग्रहालयों में तब्दील करने का रास्ता भी साफ हो गया है। इन प्रतिष्ठित भवनों में अब भारतीय इतिहास, संस्कृति और आधुनिक राष्ट्र निर्माण की झलक प्रस्तुत की जाएगी। इससे दिल्ली आने वाले पर्यटकों और नागरिकों को भारत के ऐतिहासिक और प्रशासनिक विकास को समझने का नया माध्यम मिलेगा।

वर्तमान में जो मंत्रालय और विभाग शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी पुरानी संरचनाओं में कार्यरत हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से कर्तव्य भवनों में स्थानांतरित किया जाएगा। इन पुरानी इमारतों का निर्माण 1950 से 1970 के बीच हुआ था और अब ये संरचनात्मक रूप से जर्जर और प्रशासनिक दृष्टि से अक्षम मानी जा रही हैं।

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत कुल दस कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट भवनों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से भवन 2 और 3 का काम अंतिम चरण में है और अगले महीने तक पूरा होने की संभावना है। भवन 10 को अगले वर्ष अप्रैल तक पूरा कर लिए जाने की योजना है, जबकि भवन 6 और 7 का निर्माण कार्य अक्टूबर 2026 तक संपन्न किया जाना प्रस्तावित है।

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि जब तक नए भवन पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हो जाते, तब तक शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन में कार्यरत मंत्रालयों को कस्तूरबा गांधी मार्ग, मिंटो रोड और नेताजी पैलेस जैसे चार नए स्थानों पर अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। यह स्थानांतरण आगामी दो वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है।

यह परियोजना न केवल प्रशासनिक सुगमता को बढ़ाएगी, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में आधुनिकता, कार्यक्षमता और वास्तुशिल्पीय उत्कृष्टता का नया प्रतीक भी बनेगी।

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