Sun. Apr 19th, 2026

मासूम की मृत्यु के बाद भी इंसानियत का सबक नहीं, परिवार को सहारा देने में नाकाम पुलिस

फर्रुखाबाद : जिले के मऊदरवाजा थाना क्षेत्र में एक मासूम बच्ची की मृत्यु के बाद प्रशासन और समाज की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जनैया सठैया के मोतीलाल राजपूत परिवार ने अपनी डेढ़ साल पहले शादी हुई बेटी सुमन और उसकी नवजात बच्ची धेवती को दो अलग-अलग चरणों में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। धेवती की स्थिति गंभीर थी और उसका इलाज दो महीने चला, जिसमें करीब 3.70 लाख रुपये खर्च हुए। ये राशि मोतीलाल ने खेत और जेवरात गिरवी रखकर जुटाई थी।बच्ची की हालत में सुधार होने पर पंचायत हुई और ससुराल पक्ष ने मां और बच्ची को अपने पास ले लिया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद ससुरालियों द्वारा सुमन पर की गई मारपीट और देखभाल की कमी के कारण धेवती की हालत फिर से गंभीर हो गई। अंततः बुधवार को मासूम ने दम तोड़ दिया।

बच्ची के शव को अंतिम संस्कार के लिए दोनों पक्षों के बीच विवाद पैदा हो गया। ननिहाल पक्ष ने इलाज में हुए खर्च की रकम वापस मिलने के बाद ही अंतिम संस्कार करने की शर्त रखी। पुलिस दो बार मौके पर गई और समझाने का प्रयास किया, लेकिन ननिहाल परिवार ने अपनी शर्त से पीछे नहीं हटे। तीन दिन तक शव घर पर रखा गया, जिससे दुर्गंध फैलने लगी और माहौल और अधिक संवेदनहीन हो गया।स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने मोतीलाल को थाने बुलाया और समझौते की पहल शुरू की। शुक्रवार शाम दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद समझौता हुआ और बच्ची का अंतिम संस्कार कराया गया।

इस पूरे मामले ने मोतीलाल और उनके परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को उजागर कर दिया। गरीब परिवार ने इलाज के लिए अपने खेत, जेवरात और अन्य संसाधन गिरवी रखे, लेकिन प्रशासनिक और सामाजिक सहयोग के अभाव में परिवार को मानसिक और भावनात्मक परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण परिवेश में दुख साझा करने के लिए लोग आए, लेकिन समस्या का समाधान निकालने में कोई मदद नहीं कर सका।इस घटना ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर किया है। आर्थिक तंगी और प्रशासनिक जटिलताओं के बीच एक मासूम की मौत ने परिवार और गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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