Wed. Apr 22nd, 2026

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

देहरादून: : नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास परिसर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ आउटलेट का शुभारंभ किया। यह आउटलेट उत्तराखण्ड की पारंपरिक धरोहर और जैविक उत्पादों को राजधानी दिल्ली में संगठित रूप से प्रस्तुत करने का माध्यम बनेगा, जो न केवल राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को देशभर में प्रदर्शित करेगा बल्कि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में सहायक भी होगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पहल राज्य सरकार की उस दूरदृष्टि का परिणाम है, जिसका उद्देश्य पर्वतीय अंचलों में उत्पादित प्राकृतिक एवं हस्तनिर्मित वस्तुओं को वैश्विक पहचान दिलाना है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय कारीगरों व शिल्पकारों को नए अवसर प्राप्त होंगे।

चारधाम यात्रा और अन्य तीर्थ स्थलों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड के जैविक उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 13 से अधिक स्थानों पर फ्लोर स्टैंडिंग यूनिट्स और रिटेल कार्ट्स की स्थापना की है। ये कार्ट्स नैनी सैनी व पंतनगर एयरपोर्ट, देहरादून हेलीपैड, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गुप्तकाशी, हर्षिल, मसूरी, कौडियाला, ऋषिकेश, नैनीताल और दिल्ली हाट जैसे स्थानों पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।

इसके साथ ही मैरियट मसूरी, ताज देहरादून, एफआरआई, एलबीएस अकादमी तथा अन्य प्रमुख होटलों और संस्थानों में भी इन उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के उत्पाद अब अमेज़न, ब्लिंकिट और houseofhimalayas.com जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर भी उपलब्ध हैं।

सचिव ग्रामीण विकास राधिका झा ने बताया कि यह ब्रांड गुणवत्ता के बल पर तेजी से लोकप्रिय हुआ है और अब उत्तराखण्ड के प्रमुख होटलों जैसे ताज, हयात, मैरियट, वेस्टिन और जेपी ग्रुप के साथ रणनीतिक साझेदारी कर चुका है। इन होटलों में रिटेल कार्ट्स की स्थापना से उच्च श्रेणी के पर्यटकों को स्थानीय उत्पादों की सीधी उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।

ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की अवधारणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 के दौरान प्रस्तुत की गई थी। इसके तहत बुरांश का शरबत, जंगली शहद, पहाड़ी दालें, पारंपरिक मसाले, हस्तनिर्मित वस्त्र और जैविक उत्पादों को व्यवस्थित रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाया जा रहा है। यह पहल आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की दिशा में एक ठोस कदम है, जो सतत पर्यटन और स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण को भी बल प्रदान कर रही है।

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