जंतर-मंतर आंदोलन का असर मुंबई पर, जुलूस और लाउडस्पीकर समेत कई गतिविधियों पर रोक
मुंबई : एक तरफ़ जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दल खुलकर समर्थन में उतर आए हैं, तो दूसरी तरफ़ संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए मुंबई पुलिस ने पूरे शहर में सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन की गूंज अब मुंबई तक पहुंच गई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन को कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हाल ही में दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शनकारी युवाओं से मुलाकात की और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया। वहीं, राज ठाकरे ने भी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के समर्थन में अपनी आवाज़ उठाई है। इसके अलावा एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है।
राजनीतिक समर्थन के बीच मुंबई पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। संभावित विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त तक पूरे मुंबई में निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ऑपरेशन्स) अकबर पठान द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, इस अवधि में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी। इसके अलावा जुलूस निकालने, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि-विस्तारक उपकरणों के इस्तेमाल, म्यूज़िकल बैंड और जुलूस के दौरान पटाखे फोड़ने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
मुंबई पुलिस का कहना है कि यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की समस्या से बचा जा सके। हालांकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज़ दबाने की कोशिश बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में और गरमा सकता है।
फिलहाल, मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए है। अब देखना होगा कि विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक समर्थन के बीच आगे क्या नया घटनाक्रम सामने आता है।