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स्मृति शेष: आदिल अख्तर के निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति

जोधपुर : 14 नवम्बर 2025 को जहां देश भर में स्व 0 प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन बाल दिवस के रूप में मनाया जा रहा था और चारों ओर खुशियां मनाई जा रहीं थी इसी बीच शाम को हमारे वरिष्ठ पत्रकार आदिल अख्तर इस नश्वर संसार को छोड़कर परलोक सिधार गए । उनके निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है जिसकी पूर्ति करना असंभव सा हैं । पत्रकार आदिल अख्तर ने दैनिक जलते दीप , जनगण व तीसरा प्रहर में अपनी सेवाएं दी । वे जब जलते दीप में कार्यरत थे और जलते दीप का कार्यालय गोल बिल्डिंग पोस्ट आफिस के सामने की गली में था तब मैं लोकमंच स्तंभ में जन समस्याएं और आलेख लिखकर ले जाया करता था और वे उन्हें प्राथमिकता के साथ प्रकाशित किया करते थे ।वे बड़े ही शांत प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और बड़े ही मिलनसार थे ।

शाम के वक्त वे मंगल सिंह बुक स्टाल , स्टेशन रोड पर या फिर गांधी शांति प्रतिष्ठान केन्द्र सोजती गेट पर वरिष्ठ पत्रकार एवं गांधीवादी विचारक नेमीचन्द्र जैन भावुक साहब के यहां मिल जाया करते थे । उन्होंने सदैव साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया । वे जितना कम बोलते थे उतना ही स्नेह और सम्मान के साथ बातचीत करते थे । उनमें लेस मात्र का भी अंहकार नहीं था । वे तो सादगी कि प्रतिमूर्ति थे ।उन्होंने जिस समय पत्रकारिता आरम्भ की थी उस समय आज जितनी सुविधाएं नहीं थी उसके बावजूद भी उन्होंने हर प्रेस विज्ञप्ति को बड़े ही सुन्दर ढंग से पुनः लिखकर पढ़ने योग्य बनाते थे । चूंकि उनकी लेखनी में एक अनोखा सा जादू था ।

उन्होंने पीत पत्रकारिता से दूर रहकर सदैव रचनात्मक और मिशनरी पत्रकारिता की । वे सादा जीवन और उच्च विचारों के धनी थे ।उनके हाथ में हर वक्त एक डायरी हुआ करती थी जिसमें वे सायरी लिखा करते थे । स्व 0 आदिल अख्तर को कभी भी ऊंची आवाज में बात करते हुए नहीं देखा । वे सबके साथ मधुर संबंध बनाये रखते थे । यही वजह है कि जो व्यक्ति एक बार उनके सम्पर्क में आ जाता था वह सदा सदा के लिए उनका मित्र बन जाता था ।आदिल अख्तर मिशनरी पत्रकारिता के दीवाने , कलमकार , निर्भीक और निष्पक्ष राष्ट्र सेवक थे । अपने जीवन के अंतिम दिनों तक वे अन्याय , अत्याचार व शोषण जैसी बुराइयों के प्रति संघर्ष शील व पीड़ित पक्षकार को न्याय दिलाने के लिए उनके साथ खड़े रहें । चूंकि वे जनता की आवाज थे वे भले ही आज इस नश्वर संसार में नहीं रहे फिर भी उनके साथ बिताए गए क्षण हर वक्त हमें उनकी याद दिलाते रहेगे ।

सुनील कुमार माथुर
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
जोधपुर , राजस्थान

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