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UCC पर जयराम रमेश का निशाना, राज्यों में कानून पर उठे सवाल

नई दिल्ली : समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए यूसीसी महज कानूनी सुधार का विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा है। उन्होंने राज्यों में अलग-अलग यूसीसी लागू किए जाने को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे देश में कानूनों की एकरूपता के बजाय नई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

जयराम रमेश ने महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए गठित राज्य सरकार की समिति से बंबई उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश के इस्तीफे और समिति के कामकाज को लेकर उठे सवालों का हवाला देते हुए कई सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें देश के अलग-अलग राज्य अपनी-अपनी समान नागरिक संहिता बनाएं। रमेश ने कहा कि इसका जवाब बिल्कुल नहीं है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि क्या संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था की कल्पना की थी, जिसमें कोई राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के अनुसार अलग-अलग समान नागरिक संहिता बनाने के लिए राज्यों को आगे बढ़ाए। उन्होंने 17 जून 2016 को मोदी सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता के मुद्दे को विस्तृत अध्ययन के लिए 21वें विधि आयोग के पास भेजे जाने का उल्लेख किया।

रमेश के मुताबिक, विस्तृत अध्ययन के बाद विधि आयोग ने 31 अगस्त 2018 को ‘पारिवारिक कानून में सुधार’ पर अपना परामर्श पत्र जारी किया था। उन्होंने कहा कि परामर्श पत्र के पृष्ठ सात के अनुच्छेद 1.15 में आयोग ने स्पष्ट किया था कि इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय। कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि आयोग ने इसके बजाय देश की कानूनी और सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखते हुए अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।

रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने उसी विधि आयोग के निष्कर्षों को नजरअंदाज कर दिया, जिसे उसने यूसीसी के मुद्दे की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भाजपा शासित कई राज्यों ने अपनी-अपनी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

कांग्रेस नेता के अनुसार, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता 27 जनवरी 2025 से लागू हुई, जबकि गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026, असम विधानसभा ने 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को यूसीसी विधेयक पारित किया। रमेश ने दावा किया कि राज्य स्तर पर बनाई जा रही ये समान नागरिक संहिताएं एक जैसी नहीं हैं और इनमें अलग-अलग प्रावधान, दंड, प्रक्रियाएं तथा विभिन्न छूट शामिल हैं।

उन्होंने उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि इसमें कई पितृसत्तात्मक परंपराएं अब भी बनी हुई हैं और राज्य के कानून का पालन करने वाले लोगों के सामने भी कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं।

रमेश ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि NDA के अन्य दलों की आवाज दबाई जा रही है और भाजपा उन्हें चुप करा रही है।

कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के लिए समान नागरिक संहिता ऐसा कानूनी सुधार नहीं है, जिसे व्यापक विचार-विमर्श, सार्वजनिक बहस और अधिकतम संभव सहमति के आधार पर लागू किया जाए। उनके मुताबिक, भाजपा इसे राजनीतिक रूप से लोगों को प्रभावित करने और समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।

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