जंतर-मंतर आंदोलन के बीच बड़ा फैसला, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
नई दिल्ली:: नीट परीक्षा विवाद और देशभर में चले छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने देश के युवाओं के नाम एक भावुक पत्र जारी करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के चार दशक से अधिक समय छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित किए हैं और हमेशा यह माना है कि एक सशक्त, समावेशी तथा दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होती है।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच X पर भी अपने फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर और देशभर में चल रहे हालात का फायदा कोई देश-विरोधी तत्व न उठा सके, देश की एकता बनी रहे और छात्र कानूनी पेचीदगियों में उलझने के बजाय अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान दे सकें, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
उन्होंने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत सम्मान या राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी निभाने की भावना से लिया गया कदम है। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास सर्वोपरि है और यदि किसी विवाद के कारण उस विश्वास पर प्रश्नचिह्न लगता है तो जिम्मेदारी स्वीकार करना लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है।
सूत्रों के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की पेशकश की थी। उन्हें पद से हटाया नहीं गया, बल्कि सरकार ने उनके इस फैसले का सम्मान किया। इससे यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी ने उन्हें सम्मानजनक विदाई देने का निर्णय लिया।
ओडिशा में जन्मे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार वर्ष 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद उन्हें दोबारा इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन समेत कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू हुईं, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों ने सरकार और शिक्षा मंत्रालय को लगातार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर रखा।
मई में आयोजित NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक के आरोपों ने इस पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया। इसके बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। जंतर-मंतर पर भी लंबे समय तक छात्र संगठनों का आंदोलन जारी रहा, जिसमें परीक्षा रद्द करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी मांगें प्रमुख रहीं।
इसी बढ़ते दबाव और लगातार जारी विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपती है और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बहाल करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।