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संसद भवन परिसर में अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि, पीएम और उपराष्ट्रपति हुए शामिल

दिल्ली: डॉ. बी. आर. अंबेडकर की पुण्यतिथि हर वर्ष 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन राष्ट्रनिर्माण में उनके अप्रतिम योगदान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करने के लिए समर्पित है। बौद्ध दर्शन में परिनिर्वाण मृत्यु के बाद मुक्ति का प्रतीक है, और इसी भाव के साथ अंबेडकर की पुण्यतिथि पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को बाबासाहेब अंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अंबेडकर की दूरदर्शी सोच राष्ट्र का मार्गदर्शन करती रहती है। मोदी ने यह भी कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए कार्य करते समय अंबेडकर के सिद्धांत प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के साथ संसद भवन परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

अंबेडकर को आधुनिक भारत का अग्रदूत माना जाता है। वे एक न्यायविद, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और राजनीतिक चिंतक थे। संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सभी नागरिकों को समान न्याय, सम्मान और अधिकार मिले, इसके लिए अथक प्रयास किया और भारतीय लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी। वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून एवं न्याय मंत्री भी रहे और अनेक ऐतिहासिक कानूनी सुधारों का नेतृत्व किया।

बाद के समय में अंबेडकर ने जाति-आधारित असमानताओं को अस्वीकार करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया और दलित बौद्ध आंदोलन के प्रेरक बने। उनके विचार और संघर्ष आज भी करोड़ों लोगों को समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय के लिए आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं।

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