जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लिया हिरासत में
दिल्ली : जंतर-मंतर पर मंगलवार सुबह तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे सहित संगठन के अन्य सदस्य शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए एक्स पर लिखा कि प्रतिरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। हालांकि, पुलिस की ओर से अब तक हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की संख्या और कार्रवाई के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।
अभिजीत दिपके ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा कि कुछ लोगों से कथित तौर पर यह कहा गया कि वे इस बार मतदान नहीं कर सकते तो अगली बार कर लेंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कही जा सकती है कि वह इस बार चुनाव न लड़ें और अगली बार लड़ लें। दिपके ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों और देशभर के लोगों से आंदोलन में एकजुट होने की अपील की।
सीजेपी के नेताओं और पुलिस के बीच यह घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों से जारी है। 10 अक्टूबर को पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से हिरासत में लिया गया था। तीनों नेता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। पार्टी ने उस समय भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।
इसके बाद 11 अक्टूबर को तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया। रिहाई के बाद भी पार्टी ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।
12 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस से 24 घंटे के भीतर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय निर्धारित करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि पुलिस की ओर से समय तय नहीं किया जाता है, तो पार्टी खुद प्रदर्शन की घोषणा करेगी।
इसी बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर रोड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया। पुलिस की ओर से रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थानों का सुझाव दिया गया। सीजेपी ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग जारी रखी। इसके अगले दिन, 13 अक्टूबर की सुबह, पार्टी के नेता और कार्यकर्ता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पार्टी का कहना है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, ताजा हिरासत की कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही इसकी वजह और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।