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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी के निधन पर राष्ट्रपति-पीएम ने जताया शोक

देहरादून : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मेजर जनरल (सेनि) भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक्स पर कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा देने के बाद खंडूड़ी ने जनसेवा में ईमानदारी, सादगी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश और उत्तराखंड के विकास, सुशासन और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने शोक संतप्त परिवारजनों और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत तक खंडूड़ी ने बहुमूल्य योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए उनका समर्पण मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में स्पष्ट दिखाई दिया। देशभर में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए उनके प्रयास प्रेरणादायक रहे। उन्होंने शोक की इस घड़ी में परिजनों और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ‘ओम शांति’ कहा।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने भी खंडूड़ी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड के विकास, सुशासन और सैनिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशहित में लिए गए उनके कई महत्वपूर्ण फैसलों ने विकास को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी की सादगी, स्पष्टवादिता और कार्यकुशलता हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगी। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को उत्तराखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति बताया।

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