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महिला सुरक्षा पर सवाल, मंत्री रेखा आर्य के आरोपों से मचा हड़कंप

देहरादून: उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य से जुड़ा मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। यदि प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहीं एक महिला मंत्री स्वयं अपने पति से जान का खतरा होने की बात कह रही हैं, इस संबंध में ऑडियो जारी कर रही हैं और पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज करा रही हैं, तो यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद का मामला नहीं रह जाता, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश की एक मंत्री को ही अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करनी पड़ रही है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की व्यवस्था कितनी प्रभावी है? जिस राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, वहां यदि सत्ता में बैठी एक महिला जनप्रतिनिधि को ही अपनी जान का खतरा होने की बात सार्वजनिक रूप से कहनी पड़ रही है, तो इस मामले को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जा सकता।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि मंत्री रेखा आर्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? उनकी ओर से दी गई शिकायत पर पुलिस और संबंधित प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है? क्या शिकायत की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है? यदि शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? प्रदेश की जनता इन सवालों के स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब चाहती है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेखा आर्य स्वयं महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री हैं। उनके विभाग की जिम्मेदारी महिलाओं और बच्चों के हितों की रक्षा तथा उनसे जुड़े मुद्दों पर काम करना है। ऐसे में उनसे जुड़े इस घटनाक्रम ने महिला सुरक्षा को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए, लेकिन शिकायत की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उचित कदम उठाना सरकार और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

हमारी मांग स्पष्ट है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए। जारी किए गए ऑडियो की प्रमाणिकता और उसकी वास्तविकता का पता लगाने के लिए विधिसम्मत तरीके से फॉरेंसिक जांच कराई जाए। शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्षता से पड़ताल हो, संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए। जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव, पक्षपात या अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी घोषित करना भी उचित नहीं होगा। कानून का शासन तभी मजबूत होता है, जब शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित हो, जांच निष्पक्ष हो और कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस मामले में केवल औपचारिक बयान देने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायतकर्ता की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है और मामले की जांच किस स्तर पर पहुंची है। महिला सुरक्षा केवल भाषणों, नारों और सरकारी विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर जमीन पर दिखाई भी देनी चाहिए।

उत्तराखंड की जनता यह जानना चाहती है कि जब एक मंत्री अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करती हैं, तो सरकार कितनी गंभीरता से इस मामले को लेती है। यदि किसी महिला को खतरे की आशंका है, तो उसकी शिकायत को पूरी गंभीरता से सुनना और उसे आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन का दायित्व है। पद और प्रतिष्ठा से परे हर नागरिक को सुरक्षित वातावरण और न्याय पाने का समान अधिकार है।

हमारी मांग है कि इस मामले में पारदर्शिता बरती जाए, शिकायत की निष्पक्ष जांच हो, ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जांच में आरोप साबित होने पर कानून के मुताबिक कठोर कार्रवाई हो।

महिला सुरक्षा कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। कानून सबके लिए समान होना चाहिए। चाहे मामला किसी आम महिला का हो या प्रदेश सरकार की किसी मंत्री का, शिकायत की गंभीरता, सुरक्षा और न्याय के मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

अब सवाल सरकार से है—मंत्री रेखा आर्य की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और उनकी शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

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