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“अपने ही देश में शरणार्थी: मुर्शिदाबाद की आग में जलते घर और टूटते सपने”

मुर्शिदाबाद/कोलकाता :  पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ छिड़े विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है, जिसमें एक पिता-पुत्र समेत तीन लोगों की मौत हो गई है। बढ़ती हिंसा और सांप्रदायिक तनाव के चलते कई परिवार, विशेषकर हिंदू समुदाय के लोग, बीएसएफ की मदद से अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

11 अप्रैल को समसेरगंज-धुलियान क्षेत्र में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू हो गए। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षा की तलाश में मालदा के पार लालपुर स्थित एक स्कूल में बनाए गए राहत शिविर में पहुंचे। राहत शिविर में लगभग 400-500 लोगों ने या तो गंगा पार करके या 60 किलोमीटर पैदल चलकर शरण ली है।

शिविर में रह रहे केशव मंडल ने बताया, “हमारा सब कुछ जल गया। हमें नहीं पता कि अब वापस कब जा पाएंगे।” वहीं, रूपा मंडल ने कहा, “हम खाना खा रहे थे, तभी कुछ लोग घर में घुस आए और लूटपाट व आगजनी शुरू कर दी। बीएसएफ ने हमें सुरक्षित निकाला। अब हमें सरकार से मुआवज़ा चाहिए।”

24 वर्षीय सप्तमी मंडल ने कहा, “हम अपने ही देश में शरणार्थी जैसा महसूस कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि कैसे उनके पड़ोसी का घर जला दिया गया और उनके घर पर पथराव हुआ।

इस बीच, दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर इलाके में भी विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए और कई पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई। पुलिस ने रैली में शामिल होने जा रहे प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान की ओर बढ़ने से रोकने की कोशिश की, जिससे बवाल मच गया।

आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व में हो रही इस रैली के दौरान बसंती राजमार्ग के पास भोजेरहाट में भीड़ और पुलिस के बीच तीखा संघर्ष देखने को मिला। पुलिस का दावा है कि मुर्शिदाबाद में हालात अब काबू में हैं, पर दूसरी ओर विरोध प्रदर्शनों के राज्य के अन्य हिस्सों में फैलने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

राज्य सरकार की ओर से अभी तक विस्थापितों के लिए कोई स्पष्ट पुनर्वास योजना की घोषणा नहीं की गई है, जिससे इन लोगों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

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