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रूड़की अस्पताल आयुष्मान योजना से डिइंपैनल,फर्जी NBH प्रमाण पत्र का आरोप

देहरादून: आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध हरिद्वार जनपद के रूड़की अस्पताल पर गंभीर कार्रवाई की गई है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इस अस्पताल को डिइंपैनल कर दिया है और करीब सत्तर लाख रुपये की रिकवरी के साथ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल पर आरोप है कि उसने फर्जी एनएबीएच (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) प्रमाण पत्र के जरिए योजना का लाभ उठाया और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक (हॉस्पिटल मैनेजमेंट) की ओर से जारी आदेश के अनुसार, रूड़की अस्पताल ने सूचीबद्धता के दौरान जो एनएबीएच प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, वह राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पोर्टल पर उपलब्ध प्रमाण पत्र से मेल नहीं खाता। इस मामले में एनएबीएच की ओर से भी पहले ही एक परिपत्र जारी किया गया था, जिसमें फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने की शिकायतों पर सतर्क रहने और जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल पर ही तय करने की बात कही गई थी।

जांच के बाद अस्पताल पर 70,54,118 रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है और यह राशि एक सप्ताह के भीतर जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। यदि राशि समय पर जमा नहीं की गई तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। एनएबीएच प्रमाण पत्र का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह अस्पताल की सुविधाओं और सेवाओं का मूल्यांकन कर दो श्रेणियों—एंट्री लेवल और फुल एनएबीएच—में प्रमाण पत्र प्रदान करता है। एंट्री लेवल एनएबीएच अस्पतालों को 10 प्रतिशत और फुल एनएबीएच अस्पतालों को 15 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा दी जाती है। इसके अलावा, ऐसे अस्पतालों में रैफरल की अनिवार्यता नहीं होती, जिससे मरीज सीधे लाभ ले सकते हैं।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना जोशी (आईएएस) ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना जन कल्याण से जुड़ी योजना है और इसमें निर्धारित मानकों का उल्लंघन एक गंभीर अपराध है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि इस तरह की गड़बड़ियां न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के अधिकारों का भी हनन करती हैं।

यह कार्रवाई राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे अन्य अस्पतालों को भी संदेश जाएगा कि यदि वे अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करते हैं या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेते हैं, तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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