Sat. Jan 17th, 2026

ग्लोबल मार्केट्स की कमजोरी का असर, सेंसेक्स 285 अंक टूटा

वैश्विक बाजारों के कमजोर रुझानों के प्रभाव से घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार दबाव में रहा। दो दिनों की लगातार तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली की, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांक लाल निशान में खुलकर नीचे फिसल गए। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती मिनटों में 285.28 अंक टूटकर 85,347.40 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 82.6 अंक गिरकर 26,109.55 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। अंतरराष्ट्रीय संकेत कमजोर होने और एशियाई बाजारों में एक साथ गिरावट से घरेलू निवेश धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा।

सेंसेक्स में शामिल 30 प्रमुख कंपनियों में से अधिकांश शेयर दबाव में रहे। आईसीआईसीआई बैंक, इटर्नल, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील और पावर ग्रिड के शेयरों में गिरावट सबसे अधिक रही, जिससे इंडेक्स पर भारी असर पड़ा। दूसरी ओर कुछ चुनिंदा शेयरों में तेजी भी देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाइटन और एशियन पेंट्स के शेयरों में खरीदारों का रुझान मजबूत रहा और ये स्टॉक हरे निशान में बने रहे।

वैश्विक स्तर पर भी बाजार की स्थिति कमजोर रही। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स सभी गिरावट में कारोबार करते देखे गए। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर साफ दिखाई दिया।

कमोडिटी बाजार में भी नरमी का रुख दिखा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड के दाम 1.29 प्रतिशत टूटकर 62.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए, जिससे ऊर्जा से जुड़े शेयरों पर असर देखा गया। वहीं, रुपये और बॉन्ड मार्केट में स्थिरता बनी रही, लेकिन निवेशकों का फोकस आज भी वैश्विक संकेतों और फॉरेक्स मूवमेंट पर था।

निवेश प्रवाह के मोर्चे पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की भूमिका सकारात्मक रही। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने गुरुवार को शुद्ध रूप से 283.65 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि डीआईआई ने 824.46 करोड़ रुपये की खरीदारी की। संस्थागत निवेशकों की यह सक्रियता बाजार के लिए राहत की बात है, हालांकि वैश्विक दबाव के चलते शुरुआती कारोबार में कमजोरी जारी रही।

विश्लेषकों का मानना है कि बाजार की दिशा आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और डॉलर की चाल पर निर्भर रहेगी। निवेशकों को सावधानी के साथ कदम बढ़ाने और चुनिंदा सेक्टर्स में अवसरों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

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