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उपग्रह आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत करने की आवश्यकता : सतपाल महाराज

देहरादून/दिल्ली : उत्तराखंड के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोकनिर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से बने ग्लेशियरों और बड़े तालाबों का अध्ययन करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन संवेदनशील इलाकों में समय रहते वैज्ञानिक अध्ययन होने से भविष्य में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में हुई मुलाकात के दौरान सतपाल महाराज ने कहा कि देश के पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटना और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं आमतौर पर आती रहती हैं, जिससे भारी जन-धन की हानि होती है। हाल ही में उत्तराखंड के उत्तरकाशी, पौड़ी और चमोली जिलों सहित हिमाचल प्रदेश में भी अचानक बादल फटने की घटनाओं ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन आपदाओं की सटीक और त्वरित जानकारी मिलती, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।

सतपाल महाराज ने बताया कि देश के पास उपग्रह तकनीक और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली उपलब्ध है, लेकिन इसे और सुदृढ़ एवं सटीक बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मौसम विभाग और पृथ्वी विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों को पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष अध्ययन करना चाहिए ताकि प्राकृतिक जलस्रोतों और ग्लेशियरों से जुड़ी संभावित आपदाओं का पहले से पता चल सके।

उन्होंने उपग्रह आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करने, बादल फटने और अन्य आपदाओं की जानकारी तुरंत राज्यों और स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाने, साथ ही मोबाइल नेटवर्क, रेडियो, टीवी और अन्य संचार माध्यमों से आम जनता तक चेतावनी संदेश पहुंचाने की व्यवस्था पर जोर दिया।

सतपाल महाराज ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से अनुरोध किया कि इस मुद्दे को मानवीय मूल्यों से जोड़कर देखा जाए और संबंधित विभागों को त्वरित व सकारात्मक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से होने वाले बड़े नुकसान से बचाव संभव हो सके।

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