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चावड़ी बाजार में तीन मंजिला इमारत ढही, दो की मौत,कई दबे होने की आशंका

दिल्ली : चावड़ी बाजार इलाके में सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां गली सितारा में चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के नजदीक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसा सुबह करीब 9 बजकर 50 मिनट पर हुआ। इस दुर्घटना में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि मलबे में कई अन्य लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। इनमें पानी के टैंकर और बचाव अभियान में इस्तेमाल होने वाले वाहन भी शामिल हैं। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं।

इसी बीच चांदनी चौक स्थित दिल्ली नगर निगम के 160 साल से अधिक पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल का एक हिस्सा भी ढहने की जानकारी सामने आई है। निगम अधिकारी के अनुसार, इमारत का प्रभावित हिस्सा पहले ही जर्जर और असुरक्षित घोषित किया जा चुका था। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग की गई थी और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी।

पिछले सप्ताह लगातार दो दिनों तक हुई भारी बारिश के बाद इमारत के एक हिस्से ने जवाब दे दिया। इसके चलते मुख्य प्रवेश द्वार पर बने पोर्च की छत और दो भारी बीम नीचे गिर गईं। हादसे में इमारत के सामने का हिस्सा, पहली मंजिल का कुछ भाग और मुख्य द्वार के आसपास की दीवारों को नुकसान पहुंचा है। प्रवेश द्वार के ऊपर लगी घड़ी भी प्रभावित हुई है, जबकि पास की एक अन्य दीवार में दरारें आ गई हैं।

MCD के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस हिस्से में नुकसान हुआ है, उसे पहले ही असुरक्षित घोषित किया गया था। लोगों को वहां जाने और इमारत के उस हिस्से में प्रवेश नहीं करने की हिदायत दी गई थी। आगंतुकों के लिए भी इस क्षेत्र का इस्तेमाल बंद कर दिया गया था। इमारत की कमजोर संरचनात्मक स्थिति को देखते हुए सुरक्षा के सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए गए थे।

टाउन हॉल का निर्माण वर्ष 1863 में पूरा हुआ था। यह ऐतिहासिक इमारत उस स्थान पर बनाई गई थी, जहां कभी मुगल बादशाह शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम की बनवाई हुई एक सराय हुआ करती थी। इस सराय के आसपास मौजूद बगीचे को बेगम का बाग कहा जाता था।

साल 1857 में दिल्ली पर अंग्रेजों का कब्जा होने के बाद पुरानी सराय को ध्वस्त कर दिया गया और बगीचे का नाम बदलकर कंपनी बाग रख दिया गया। बाद में इसी स्थान पर टाउन हॉल का निर्माण हुआ। शुरुआत में यहां दिल्ली इंस्टीट्यूट स्थापित किया गया था, जिसे लॉरेंस इंस्टीट्यूट के नाम से भी जाना जाता था।

समय के साथ यह इमारत दिल्ली के नगर प्रशासन का प्रमुख केंद्र बन गई। करीब 145 वर्षों तक यहां नगर पालिका का मुख्यालय संचालित होता रहा। बाद में दिल्ली नगर निगम ने अपना कार्यालय नए सिविक सेंटर में स्थानांतरित कर दिया। वर्षों के दौरान टाउन हॉल में कई बदलाव किए गए और इसमें नए हिस्से भी जोड़े गए।

इस ऐतिहासिक परिसर का दरबार हॉल भी खास महत्व रखता था। यहां औपचारिक स्वागत समारोह, सरकारी कार्यक्रम और महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया जाता था। इसके अलावा परिसर में एक अन्य बैठक हॉल भी मौजूद था, जिसका उद्घाटन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 10 अगस्त 1947 को किया था। खास बात यह है कि यह उद्घाटन देश की आजादी से महज पांच दिन पहले हुआ था।

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