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स्व. रामवृक्ष सहनी: सिमरा पंचायत के जननायक और समाजसेवा के अमर प्रतीक

मुजफ्फरपुर : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड अंतर्गत सिमरा गांव की पावन धरती ने अनेक विभूतियों को जन्म दिया है। इन्हीं में एक विशिष्ट नाम स्वर्गीय रामवृक्ष सहनी जी का है, जिन्होंने अपने कर्म, त्याग, सामाजिक प्रतिबद्धता और जनसेवा से न केवल सिमरा पंचायत, बल्कि पूरे क्षेत्र में अपनी अमिट पहचान स्थापित की। उनका जीवन लोककल्याण, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी गाथा है।

मेरे अभिभावक समान रामवृक्ष सहनी जी का विराट व्यक्तित्व सदैव वंदनीय रहेगा। उनके सत्कर्मों की सुगंध और जनसेवा की विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

जन्म, संस्कार और शिक्षा-

स्व. रामवृक्ष सहनी जी का जन्म 6 अगस्त 1944 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड अंतर्गत सिमरा गांव में हुआ था। माता सीता देवी जी और पिता शिवचरण सहनी जी से प्राप्त उच्च संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को उदात्तता, संवेदनशीलता और सेवाभाव से समृद्ध किया।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा सिमरा गांव की प्राथमिक पाठशाला में हुई। इसके बाद उन्होंने राजकीय श्री मोहन उच्च विद्यालय से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा के क्रम में उन्होंने मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित लंगट सिंह महाविद्यालय से दर्शनशास्त्र विषय में प्रतिष्ठा के साथ स्नातक किया तथा बिहार विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

दर्शनशास्त्र का गहन अध्ययन उनके जीवन-दर्शन, चिंतन और सामाजिक दृष्टिकोण में प्रतिबिंबित होता था। वे 13 जनवरी 2022 को इस नश्वर संसार से विदा होकर देवलोक गमन कर गए, किंतु उनके विचार और कर्म आज भी जीवंत हैं।

गृहस्थ जीवन और संस्कारों की विरासत-

7 जुलाई 1965 को उनका विवाह सोना देवी जी के साथ संपन्न हुआ। उनकी धर्मपत्नी जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में उनकी सहधर्मिणी बनकर साथ रहीं तथा सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संयोगवश, 7 जुलाई 2017 को सोना देवी जी भी इस संसार से विदा हो गईं।

रामवृक्ष सहनी जी ने अपने छह संतानों-तीन पुत्रियों और तीन पुत्रों-को उच्च संस्कार, शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके परिवार की उपलब्धियां उनकी दूरदर्शिता और संस्कारपूर्ण पालन-पोषण की परिचायक हैं।

– रेणु कुमारी: डाकपाल के रूप में कार्यरत हैं। उनके पति बच्चाबाबू चौधरी जी सेना डाकपाल (आरएमएस, दरभंगा) हैं। उनकी पुत्री पिंकी कुमारी (माया) के पति श्री वंशीधर ब्रजवासी जी वर्तमान में तिरहुत स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य हैं।
– राजेश कुमार: खाद्य आपूर्ति विभाग में डीलर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी रंजू कुमारी शिक्षिका हैं।
– सुजीत कुमार: शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक के रूप में योगदान दे रहे हैं। उनकी पत्नी अनीता कुमारी भी शिक्षिका हैं।
– महेश कुमार: कृषक होने के साथ-साथ जिला एवं सत्र न्यायालय में निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी विनू कुमारी कुशल गृहिणी हैं।
– मीनाक्षी कुमारी: शिक्षिका के रूप में समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं।
– रींजू चौधरी: व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं।

पंचायत नेतृत्व और जनसेवा का गौरवशाली अध्याय-

स्व. रामवृक्ष सहनी जी का सार्वजनिक जीवन जनविश्वास, कर्मठता और लोकसेवा का उज्ज्वल उदाहरण रहा। वर्ष 1978 से 2001 तक उन्होंने सिमरा पंचायत के मुखिया के रूप में दीर्घकाल तक जनसेवा की। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी सोना देवी जी ने भी वार्ड सदस्य के रूप में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर पंचायत के विकास में योगदान दिया।

उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियां और दायित्व इस प्रकार रहे:-

– पंचायत समिति सदस्य:वर्ष 2011 से 2016 तक।
– शैक्षणिक योगदान: पंडित यमुना कार्यी महाविद्यालय, खरौना के सम्मानित सदस्य रहे।
– खादी एवं ग्रामोद्योग: नरसिंहपुर खादी ग्रामोद्योग के वर्ष 2002 से अंतिम सांस तक सदस्य रहे।
– राजनीतिक नेतृत्व: राष्ट्रीय जनता दल, बंदरा प्रखंड के वर्ष 1999 से जीवन के अंतिम समय तक अध्यक्ष रहे।
– साक्षरता अभियान: वर्ष 1984 से 1996 तक वयस्क एवं अनौपचारिक शिक्षा पर्यवेक्षक के रूप में कार्य किया।
– समाज कल्याण: जिला निषाद विकास संघ के अध्यक्ष तथा मछुआरा राष्ट्रीय संघ के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 1980 से 2000 तक शोषित और वंचित समाज के अधिकारों एवं उत्थान के लिए आवाज उठाई।

एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व पर लेखनी चलाने का सौभाग्य-

अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि सिमरा की पावन माटी पर जन्मे ऐसे महान व्यक्तित्व के जीवन पर लेखनी चलाना मेरे लिए असीम आत्मिक प्रसन्नता और गौरव का विषय है। अपने कार्यों और जनसेवा से दूर-दूर तक पहचान स्थापित करने वाले इस जननायक के जीवन को शब्दों में पिरोना मेरे लिए सौभाग्य से कम नहीं।

मन के किसी कोने में एक कसक अवश्य है कि उनके जीवित रहते उनसे व्यक्तिगत रूप से संवाद करने और उनका प्रत्यक्ष आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल सका। उस समय शायद मुझमें इतनी समझ और बोध नहीं था कि इस विद्वान, अनुभवी और दूरदर्शी महापुरुष के सान्निध्य में बैठकर उनके अनुभवों से ज्ञान अर्जित कर सकूं।

आज जब उनके विराट व्यक्तित्व और गौरवशाली जीवन को शब्दों में अभिव्यक्त कर रहा हूं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो वे साक्षात मेरे सम्मुख उपस्थित होकर अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान कर रहे हों।

इस पुनीत अवसर पर उनके सुपुत्र श्री सुजीत जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मुझे अपने पूज्य पिताजी के जीवन और कृतित्व पर लिखने का अवसर प्रदान किया।

सेवा और समर्पण की अमर विरासत-

स्वर्गीय रामवृक्ष सहनी जी का व्यक्तित्व सेवा, त्याग, संस्कार और जनकल्याण का अनुपम संगम था। वे केवल सिमरा पंचायत के जनप्रिय जननायक ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक न्याय और लोकसेवा के समर्पित कर्मयोगी भी थे।

उनका जीवन निःस्वार्थ सेवा, अटूट जनविश्वास और मानवीय मूल्यों की ऐसी प्रेरणादायी गाथा है, जो पीढ़ियों तक समाज को सत्पथ पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी। देह से विदा होकर भी वे अपने सत्कर्मों, आदर्शों और जनसेवा की अमिट छाप के माध्यम से जनमानस में सदैव अमर रहेंगे।

कुमार संदीप
ग्राम- सिमरा, पोस्ट- श्रीकांत, प्रखंड- बंदरा, जिला- मुजफ्फरपुर, बिहार

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