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तमिलनाडु में विजय की बड़ी जीत, विश्वास मत आसानी से हुआ पार

तमिलनाडु : बुधवार को तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में सफलतापूर्वक विश्वास मत हासिल कर लिया। इसके साथ ही तमिलगा वेट्री कड़गम के नेतृत्व वाली नई सरकार ने सदन में अपना बहुमत साबित कर राजनीतिक स्थिति को और मजबूत कर लिया। 234 सदस्यीय विधानसभा में विजय सरकार के पक्ष में 144 विधायकों ने मतदान किया, जबकि विपक्ष के खाते में केवल 22 वोट आए। पांच विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। बहुमत के लिए आवश्यक 118 के आंकड़े को विजय सरकार ने आसानी से पार कर लिया।

विश्वास मत के दौरान कांग्रेस, भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग, विदुथलाई चिरुथाइगल काची, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी समेत गठबंधन के सभी सहयोगियों ने सरकार का समर्थन किया। दूसरी ओर एम. के. स्टालिन की द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। वहीं देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम के विधायकों ने भी मतदान के दौरान सदन छोड़ दिया। पट्टाली मक्कल काची के चार विधायकों और भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने मतदान से दूरी बनाए रखी।

मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय द्वारा तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट से इस्तीफा देने के कारण उनकी पार्टी के पास 107 विधायक रह गए थे, लेकिन सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार को स्पष्ट बहुमत मिल गया। इस दौरान अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम के विधायक कामराज ने भी खुलकर विजय सरकार का समर्थन किया। हालांकि उनके इस कदम के बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया।

विश्वास मत के दौरान सबसे अधिक चर्चा अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर रही। पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कुछ विधायकों द्वारा कथित तौर पर विजय सरकार के पक्ष में मतदान किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। इस कथित क्रॉस वोटिंग ने विपक्षी खेमे में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण उभरने की संभावना जताई जा रही है।

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