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अनुशासनहीनता पर कार्रवाई, श्रीजगन्नाथ सेवक को सेवा और मंदिर से दूर रखा गया

भुवनेश्वर: श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने मंदिर की गरिमा और परंपरा के उल्लंघन के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए वरिष्ठ दइतापति सेवक रामकृष्ण दासमहापात्र को 30 दिनों के लिए सेवा से निलंबित कर दिया है। इस अवधि में वे न तो भगवान की किसी सेवा में भाग ले सकेंगे और न ही मंदिर परिसर में प्रवेश कर पाएंगे।मंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि इस अवधि में दासमहापात्र किसी भी पूजा-अनुष्ठान में भाग नहीं ले सकेंगे, और किसी अन्य सेवक या नियोग को प्रभावित करने का प्रयास करने पर उनके खिलाफ और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।निलंबन आदेश के अनुसार, मंदिर के कमांडर और वरिष्ठ सुपरवाइजर नियमित रूप से रामकृष्ण दासमहापात्र के आचरण की निगरानी करेंगे और मुख्य प्रशासक को रिपोर्ट सौंपेंगे।

यदि इस दौरान किसी प्रकार की अनुशासनहीनता पाई गई, तो उनके प्राप्त पुरस्कारों को रद्द या स्थगित किया जा सकता है।प्रशासन की ओर से बताया गया कि कार्रवाई से पहले चार और नौ मई को रामकृष्ण दासमहापात्र को दो बार नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। नोटिस में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि उन्होंने नवकलेवर के दौरान संग्रहित ‘शेष दारू’ से दीघा में जगन्नाथ मूर्ति की स्थापना क्यों की और ऐसी विवादित टिप्पणी कर मंदिर की परंपरा को ठेस क्यों पहुंचाई।डॉ. पाढ़ी ने कहा, “यह कार्रवाई मंदिर में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने के लिए जरूरी थी। हमें गर्व और अहंकार से ऊपर उठकर भगवान जगन्नाथ की परंपरा और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”मंदिर प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या परंपरा के विरुद्ध कार्य को कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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