Sun. Apr 19th, 2026

गरीबी और बेबसी के बीच सपनों की जंग, अभ्यर्थियों ने मांगी निष्पक्ष जांच

देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की परीक्षा को लेकर असंतोष व्यक्त करने वाले अभ्यर्थियों नेvजांच आयोग के अध्यक्ष के सामने अपनी पीड़ा रखी। लोक सुनवाई के दौरान कई अभ्यर्थियों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता गांव में खेती या सब्जी बेचकर मेहनत की कमाई से उन्हें पढ़ने के लिए रुपये भेजते हैं। अब देहरादून में रहकर लगातार तैयारी करना उनके लिए संभव नहीं रह गया है।

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग के समक्ष उपस्थित अभ्यर्थियों ने अपनी संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का विस्तार से जिक्र किया। टिहरी गढ़वाल के दीपक नौटियाल ने कहा कि उन्हें सुबह अखबार के जरिए पेपर लीक होने की खबर मिली। यह सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गांव लौटने पर लोगों ने उनसे सवाल किया कि क्या उन्होंने भी यह पेपर दिया था। वे इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए। दीपक ने बताया कि वे वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और अब तक परिवार का सहारा बनने की उम्मीद में संघर्षरत हैं।

चमोली के सचिन पुरोहित ने भी आयोग के सामने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता गांव में सब्जी बेचकर पैसे भेजते हैं ताकि वे पढ़ाई जारी रख सकें। उन्होंने कहा कि अब यह बोझ उठाना मुश्किल होता जा रहा है। यदि वे अब भी नौकरी पाने में असफल रहे, तो वापस गांव जाकर पिता के साथ सब्जी उगाना ही बेहतर विकल्प रहेगा। सचिन ने कहा कि प्राइवेट नौकरी में पंद्रह हजार रुपये से ज्यादा नहीं मिलेंगे, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है।अभ्यर्थियों ने आयोग से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की, ताकि उनके जैसे मेहनती युवाओं का विश्वास फिर से बहाल हो सके।

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