Sat. Sep 5th, 2026

भाजपा ने वादे पूरे नहीं किए, इसलिए हुआ पुलवामा हमला: सपा नेता

नई दिल्ली : समाजवादी पार्टी के नेता सनातन पांडे के एक बयान ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। पांडे ने वर्ष 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि यह हमला किसी विदेशी आतंकी साजिश का परिणाम नहीं था, बल्कि तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी हैं।

एक समाचार एजेंसी से बातचीत में सनातन पांडे ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले हुआ पुलवामा हमला संयोग नहीं था। उनका आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी 2014 के चुनावों में किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही थी और जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की घटनाओं का राजनीतिक लाभ उठाया गया। पांडे के अनुसार भाजपा ने रोजगार, किसानों की आय दोगुनी करने, महंगाई कम करने और काला धन वापस लाने जैसे बड़े वादे किए थे, लेकिन पांच वर्षों के कार्यकाल में इनमें से किसी भी मुद्दे पर ठोस परिणाम सामने नहीं आए।

सनातन पांडे ने यह भी सवाल उठाया कि पुलवामा हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक आरडीएक्स की आपूर्ति को लेकर आज तक स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यदि यह पूरी तरह विदेशी साजिश थी, तो सरकार अब तक यह बताने में क्यों असफल रही कि इतना शक्तिशाली विस्फोटक भारत के भीतर कैसे पहुंचा। पांडे ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल विकास और जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचता रहा है और भावनात्मक मुद्दों को उछालकर सत्ता में बने रहने की कोशिश करता है।

उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। पांडे का कहना था कि चुनावों से पहले राष्ट्रीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा वास्तविक मुद्दों—जैसे गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई—पर चर्चा करने के बजाय समाज को बांटने वाले मुद्दों को प्रमुखता देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चैनल लगातार एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर जनभावनाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर हो रहा है।

गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार ठहराया था। भारत सरकार के अनुसार, हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर हवाई कार्रवाई की थी।

सरकार का दावा रहा है कि बालाकोट कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकवादी, प्रशिक्षक और संगठन के वरिष्ठ कमांडर मारे गए थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान खुफिया सूचनाओं के आधार पर किया गया था और इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले आतंकी हमलों को रोकना था। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर भी विपक्ष की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

सनातन पांडे के ताजा बयान ने एक बार फिर पुलवामा हमले और उसके बाद की घटनाओं को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्षी दल जहां सरकार की नीतियों और जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सत्ताधारी दल की ओर से ऐसे आरोपों को देश की सुरक्षा और शहीद जवानों के बलिदान का अपमान बताया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों के मद्देनज़र पुलवामा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे फिर से सियासी बहस का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं, यह भी सवाल उठ रहा है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर बयानबाजी से राजनीतिक लाभ भले ही मिले, लेकिन इससे समाज में विभाजन और अविश्वास का माहौल भी पैदा हो सकता है।

इस पूरे विवाद के बीच आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि राजनीतिक दल विकास, रोजगार और महंगाई जैसे जमीनी मुद्दों पर कितनी गंभीरता से चर्चा करते हैं और क्या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखा जा पाएगा या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *